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पाली-अजमेर सड़क पर वन विभाग के 11 किमी जर्जर हिस्से के निर्माण के लिए वन्यजीव बाेर्ड से मंजूरी लेने के आदेश
पालीऔर अजमेर को जोड़ने वाली सड़क का 11 किलोमीटर लंबा हिस्सा वन विभाग के क्षेत्राधिकार में आता है। सड़क के इस जर्जर हिस्से का निर्माण कराने को लेकर दायर जनहित याचिका की बुधवार को सुनवाई हुई। जिसमें वन विभाग की ओर से बताया गया कि निर्माण की मंजूरी के लिए प्रक्रिया लंबी है। विभाग ने कोर्ट को प्रक्रिया भी बताई। इस पर हाईकोर्ट ने निर्माण के लिए राज्य वन्य जीव बोर्ड से मंजूरी लेकर केंद्रीय वन्य जीव बोर्ड के पास भिजवाने के आदेश दिए। मामले में अगली सुनवाई 3 मार्च को होगी। याचिकाकर्ता चैनसिंह की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पाली और अजमेर को जोड़ने वाली स्टेट हाइवे की सड़क का 11 किमी लंबा जर्जर हिस्सा वन विभाग के क्षेत्राधिकार में आने का बताकर सार्वजनिक निर्माण विभाग ने अधूरा छोड़ दिया है। इस पर हाईकोर्ट ने सरकार से इस संबंध में जवाब तलब किया था। बुधवार को हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुनील अम्बवानी न्यायाधीश प्रकाश गुप्ता की बेंच के समक्ष जवाब पेश करते हुए बताया कि सड़क का हिस्सा सेंचुरी का हिस्सा है। इस निर्माण के लिए पहले राज्य वन्य जीव बोर्ड इसके बाद केंद्रीय वन्य जीव बोर्ड से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी को प्रस्ताव भेजा जाएगा। कमेटी से मंजूरी मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट से भी अनुमति लेनी जरूरी है। वन विभाग की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता डॉ.पीएस भाटी ने पैरवी की।
इस पर बेंच ने वन विभाग को राज्य वन्य जीव बोर्ड से सड़क निर्माण के लिए मंजूरी लेने इसके बाद केंद्रीय वन्य जीव बोर्ड को प्रस्ताव भिजवाने के आदेश दिए।
वन विभाग का क्षेत्राधिकार बताकर पीडब्ल्यूडी नहीं करवाया रहा निर्माण, जनहित याचिका पर वन विभाग ने हाईकोर्ट में मंजूरी की लंबी प्रक्रिया की जानकारी दी