हवाईजादों के आसमानी बजट
जमीन पर कभी कुछ नहीं आता
राजेश त्रिवेदी. जोधपुर| येहैं नगर-निगम के पिछले बोर्ड की बजट घोषणाएं जो यथार्थ की जमीन पर उतरने की बजाय हवा में ही कहीं खो गईं। हवाई इसलिए क्योंकि योजना बनाने वालों को भी पता था कि ये लागू तो नहीं ही हो पाएंगी। बिना फिजिबिलिटी रिपोर्ट, बगैर बजट और पूर्व तैयारी के यही तो होना था। इस बार का बजट भी आज पेश होने वाला है। क्या इनमें भी ऐसी ही दिखावटी घोषणा होंगी और जनता को सच में कुछ हासिल नहीं होगा?
कुल बजट का % खर्च (2014-2015)
1. कचरा प्रबंधन 1.75%
2.नए नाले 5%
3.नई सड़कें 7%
4.नई योजनाएं 2.1%
1. कामों का श्रेय लेते हंै महापौर
2.वार्ड में घोषणा पर पार्षद को लाभ
3.बनाने वाले अफसर रेटिंग बढ़ाते हैं
4. केंद्रीय योजनाओं से सरकार को
...लेकिनयह फायदा थोड़े दिन का ही, क्योंकि जनता सब समझती है।
इनसे फायदा किसको?
1. एसी बस शेल्टर
2.टॉय ट्रेन
3.दधिची देहदान केंद्र
4.बजट होटल
5.मल्टी स्टोरी पार्किंग
6.सीवरेज ट्रंक लाइन
7.गोल्फ कोर्स
8.स्टोन-क्राफ्ट मार्केट
9.मोबाइल मजिस्ट्रेट
10.हेरिटेज रोड
निगम क्षेत्राधिकार की जमीन पर जेडीए ने जमीन नीलाम कर फूड कोर्ट चालू भी करवा दिया और निगम कुछ कर पाया। ऐसे में 2012-13 बजट में इस मद में कोई प्रावधान ही नहीं दिखाया।
जमीन आबंटन का प्रस्ताव प्रशासन स्तर पर अटका रहा। निगम ने कोई प्रयास किए राज्य केंद्र सरकार ने मदद। ऐसे में दस करोड़ का बजट प्रावधान चार साल बाद दस लाख रह गया।
बीओटी आधार पर कंपनियों से प्रस्ताव मांगे। निगम चार साल में वन विभाग की एनओसी भी नहीं ले पाया। ही इसकी फिजिबिलिटी रिपोर्ट ही तैयार हुई। यह सब देख कंपनियों ने मुंह मोड़ लिया।
1. फंड कौन देगा निर्धारित नहीं होता।
2.जमीन निर्धारण बिना घोषणाएं
3.फिजिबलिटी नहीं जांचते
4.संबंधित विभागों से समन्वयन नहीं
और कागजी योजनाएं
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योजना बनाने के पहले जमीन आबंटन नहीं करवाया। 2010-11 के बजट में 5 करोड़ का प्रावधान रखा। यह राशि 2014-15 तक टोकन के रूप में 10 लाख रुपए तक पहुंच गई। आज यहां पत्थर खरपतवार के अलावा कुछ नहीं है। ( फोटो इमेजिंग)