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डायन प्रथा रोकने के लिए सरकार जल्द बनाएगी कानून
जोधपुर| हाईकोर्टके वरिष्ठ न्यायाधीश गोविंद माथुर जस्टिस जयश्री ठाकुर की खंडपीठ के समक्ष बुधवार को पुलिस महानिदेशक की ओर से शपथ पत्र पेश कर आश्वस्त किया कि सरकार अगली सुनवाई तक डायन प्रथा को रोकने के लिए कानून बनाने का पूरा प्रयास करेगी। मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी। खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता डॉ. पीएस भाटी ने शपथ पत्र पेश कर बताया कि आदिवासी क्षेत्रों में मौताणा बैर प्रथा में होने वाली घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वर्ष 2010 से 2014 तक उदयपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ , डूंगरपुर, सिरोही, सवाई माधाेपुर प्रतापगढ़ क्षेत्रों में मौताणा बैर आदि की 43 केस दर्ज हुए हैं। इस संबंध में कड़ी कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को गत 3 फरवरी को ही निर्देश दिए हैं। खंडपीठ ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में डायन मौताणा जैसी कुप्रथाएं होना समाज के लिए कलंक है। आदिवासी समुदायों में समानांतर सजा देने की परंपरा स्वीकार नहीं की जा सकती।
उल्लेखनीय है कि गत 24 नवंबर को खंडपीठ ने राज्य सरकार को डायन प्रथा रोकने के लिए कानून बनाने के आदेश दिए थे।