एल्युमिनी की मांग- ऑटोनोमस हो एमबीएम
पीछे मुड़कर देखा तो ताजा हुईं खट्टी-मीठी यादें
वर्ष 1991 में एमबीएम में कैंटिन शुरू हुई थी। इससे पहले वर्ष 1989 के बैच के स्टूडेंट्स हथाई के लिए इंजीनियरिंग कैफे जाया करते थे। पूर्व छात्र इकट्ठा होकर इंजीनियरिंग कैफे पहुंचे तथा वहां चाय की चुस्की के साथ पुरानी यादें ताजा की। 50 वर्ष पहले साथ पढ़े जयसिंह निर्वाण, बीआर व्यास बीएल चौहान भी घंटों साथ बैठे रहे।
पचास साल बाद कॉलेज आए वर्ष 1964 बैंच के स्टूडेंट्स ने परिवार के साथ ग्रुप फोटो खिंचवाई।