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धोखाधड़ी के मामले में सीबीआई कोर्ट में चार्ज बहस पूरी, फैसला सुरक्षित

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. विशिष्ट न्यायालय सीबीआई जोधपुर ने शुक्रवार को मैसर्स विकास डब्ल्यू एसपी लिमिटेड गंगानगर के प्रबंध निदेशक बीडी अग्रवाल, पत्नी विमला देवी, कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट जितेंद्र जिंदल के विरुद्ध धोखाधड़ी के मामले में दायर आरोप पत्र पर चार्ज बहस की सुनवाई पूर्ण करते हुए फैसला सुरक्षित रखा है। आरोप पत्र में यह बताया गया था कि एसबीबीजे की जयपुर शाखा में कार्यरत केंद्रीय सतर्कता अधिकारी द्वारा सीबीआई ने एक वाद प्रस्तुत कर बताया कि मैसर्स विकास डब्ल्यू एसपी के प्रबंध निदेशक बीडी अग्रवाल विमला देवी के द्वारा दिसंबर 2007 से जून 2008 की अवधि के दौरान एसबीबीजे को 21 लेटर ऑफ क्रेडिट जो नेटवेस्ट बैंक एलपीसी लंदन द्वारा जारी करना बताया गया था, में फर्जी एवं बनावटी दस्तावेज थे।
इन पत्रों के आधार पर बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से एसबीबीजे गंगानगर ब्रांच से 56.08 करोड़ रुपए धोखाधड़ी से उठा लिए। बीडी अग्रवाल के अधिवक्ता अशोक छंगाणी ने न्यायालय में यह बताया कि सीबीआई द्वारा दायर चार्जशीट अपूर्ण अनुसंधान के दायर की गई है। चार्जशीट में किस अभियुक्त का क्या किरदार रहा, यह भी नहीं बताया गया। चार्जशीट के साथ किसी प्रकार कोई दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किया गया है। 59 करोड़ रुपए, जिन्हें बैंक ने फर्जी उठाना बताया है, वह रकम एसबीबीजे से विदेशों से लेटर ऑफ क्रेडिट के एवज में देरी से प्राप्त हुई थी, जिस वजह से एसबीबीजे द्वारा गलत मान लिया गया था। सीबीआई न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है।