एडीजी से आरोपीकी464बारफोनपर बात
जिन पुलिसवालों का ट्रांसफर किया, वो प|ी के लिए दो पॉलिसी भी नहीं करा सकते?
नकलीघी सरगना दिनेश सिंघल और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक जसवंत संपतराम के बीच 1 जनवरी, 2011 से 15 दिसंबर, 2013 के बीच 464 बार फोन पर बातचीत की गई। 22 मैसेज एक्सचेंज हुए हैं। इसमें से जसवंत ने सिंघल को करीब 270 बार कॉल किए। ये बातचीत ही दोनों की साठगांठ की पूरी कहानी है। इसमें अधिकतर तबादले, निवेश और बीमा कंपनी की एजेंट प|ी के लिए पॉलिसी करवाने के संबंध में है।
कॉल रिकाॅर्डिंग में कई जगह ये बात सामने आई कि सिंघल से एडीजी कहते हैं कि जिनके तबादले करवाए, क्या वे प|ी के लिए दो पॉलिसी भी नहीं करा सकते। सिंघल और एडीजी की प|ी कमलजीत के बीच भी इसी दौरान 58 बार बातचीत है, जो बीमा के संबंध में ही है। एसीबी डीजी सेल की स्पेशल ब्रांच के प्रभारी एएसपी हरदयाल सिंह ने इस केस की जांच की। आरोप है कि जांच रिपोर्ट सौंपने के बाद उनको प्रताड़ित किया जाने लगा। इस पर वे खुद को आहत बताते हुए डीआईजी को पत्र लिखकर एक महीने की छुट्टी पर चले गए। छुट्टी से लौटने से पहले ही उनका एटीएस जोधपुर में स्थानांतरण हो गया। इसके बाद प्रकरण की जांच एएसपी नरेंद्र सिंह को दी और अब योगेश दाधीच को सौंपी गई है। जांच में सामने आया कि घी के कारोबारी दिनेश सिंघल, उसके साथी सुभाष गुप्ता, गिरधारीलाल महाजन आदि ने तत्कालीन इंस्पेक्टर वीरेंद्र कुमार, राजेश वर्मा, अशोक बुटोलिया, किशोर बुटोलिया, एएसआई ओम प्रकाश शर्मा, कांस्टेबल भवानीसिंह, हरवीरसिंह यादव, विश्राम सिंह यादव आदि से पैसे लेकर स्थानांतरण करवाए। जांच अधिकारी ने तीन प्राइवेट व्यक्ति, इंस्पेक्टर वीरेंद्र कुमार समेत 8 पुलिसकर्मियों के खिलाफ धारा 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13, (1)(ए), बी, डी, सहपठित 13 (2) एवं 14 एवं (बी) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 सपठित 109 तथा धारा 120 भा.द.स.में आरोप पत्र प्रस्तुत करने के अनुमति मांगी।
एडीजी ने रोकी गिरफ्तारी
जांचरिपोर्ट के मुताबिक दिनेश सिंघल के कहने पर तत्कालीन एडीजी विजिलेंस जसवंत सम्पतराम ने नकली घी को लेकर मुहाना थाने में दर्ज केस 279/ 2011 में पीएचक्यू के विजिलेंस में आरोपी रामावतार से एक परिवाद लेकर जांच करा दी। एसपी जयपुर दक्षिण से मुहाना थाने की प्रगति रिपोर्ट मंगवा ली। इसके बाद नियमों के खिलाफ जाकर जसवंत सम्पतराम ने खुद के हस्ताक्