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हाईकोर्ट ने दिए निकाय चुनावों में प्रत्याशियों से भरवाए जाने वाले घोषणा पत्र में संशोधन के आदेश

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन पत्र के साथ प्रत्याशियों से भरवाए जाने वाले घोषणा पत्र में अपेक्षित संशोधन के आदेश राज्य के निर्वाचन विभाग को दिए हैं। न्यायाधीश संगीत लोढ़ा ने यह आदेश श्रीगंगानगर निवासी यश मिढ्ढा की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के तहत दिए।

यह याचिका हाल में संपन्न नगर निकाय चुनावों से पहले पेश की गई थी। इसमें याचिकाकर्ता ने अधिवक्ता संजीत पुरोहित के माध्यम से स्क्रूटनिंग के दौरान अपना नामांकन पत्र खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि प्रार्थी ने पार्षद का चुनाव लड़ने के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया था, जिसके साथ निर्धारित घोषणा पत्र में बताया था कि उसके खिलाफ श्रीगंगानगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 30 सितंबर, 2014 को भारतीय दंड संहिता की धारा 452, 323 तथा 34 के तहत संज्ञान लिया है।
इसकी प्रतिलिपि भी पेश की गई थी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि न्यायालय ने केवल संज्ञान लिया है, आरोप निर्धारित नहीं किए हैं। इसके बावजूद रिटर्निंग अधिकारी ने आपराधिक प्रकरण के कारण अयोग्यता के प्रावधानों के तहत उसका नामांकन पत्र खारिज कर दिया, उसे सुनवाई का अवसर भी नहीं दिया। इस मामले में राज्य रिटर्निंग अधिकारी का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए फैसला सुरक्षित रखा था।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में याचिका खारिज करने के साथ-साथ याचिकाकर्ता की इस दलील को माना है कि चुनाव आयोग का घोषणा पत्र भ्रम पैदा करता है। इसमें अभ्यर्थी से पूछा जाता है कि क्या उसके खिलाफ न्यायालय में ऐसा आपराधिक मामला विचाराधीन है, जिसमें न्यायालय ने आरोप निर्धारित किए हों और उसके विरुद्ध संज्ञान लिया गया है, यदि हां तो विवरण दें।
इसमें अभ्यर्थी यह स्पष्ट ही नहीं कर पाता कि उसके खिलाफ केवल संज्ञान लिया गया है, आरोप विचरित नहीं किए गए हैं। आरोप विचरित होने और संज्ञान लेने का विवरण अलग-अलग अंकित करने का कोई विकल्प नहीं होने से रिटर्निंग अधिकारी हां में घोषणा करने पर यह धारणा कर सकता है कि अभ्यर्थी के खिलाफ आरोप पत्र विचरित करने के साथ-साथ संज्ञान लिया जा चुका है। इसे देखते हुए हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को घोषणा पत्र मे अपेक्षित संशोधन करने के आदेश दिए हैं।