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250 स्कूली मिनी बसों के पास ऑथोराइजेशन सर्टिफिकेट नहीं

7 वर्ष पहले
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सिटीट्रांसपोर्ट के साथ स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने में उपयोग ली जा रही 250 से अधिक मिनी सिटी बसों के संचालकों ने दो साल से ऑथोराइजेशन सर्टिफिकेट नहीं लिया है। राज्य सरकार ने इन बसों के लिए निर्धारित शुल्क जमा करवाने के साथ ही बस का भौतिक निरीक्षण करवाकर यह सर्टिफिकेट प्राप्त करना अनिवार्य कर रखा है। सरकार के निर्देशों की अवहेलना के चलते अब परिवहन विभाग इन मिनी बसों के खिलाफ सोमवार से कानूनी कार्रवाई करेगा। इसमें बसों का परमिट रद्द करने के लिए पंच करने से लेकर जुर्माना वसूलने और रूट से हटाने तक की कार्रवाई की जा सकती हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार शहर ने कई अंग्रेजी हिंदी माध्यम की स्कूलों ने छात्रा-छात्राओं को लाने-ले जाने के लिए अपनी बाल वाहिनियां नहीं लगाकर मिनी सिटी बसों से अनुबंध कर रखा है। ऐसी 250 से अधिक सिटी बसें स्कूल समय में छात्र-छात्राओं को लाने-ले जाने के बाद शेष समय अपना मूल काम सिटी ट्रांसपोर्ट का करती हैं। डीटीओ नवलकिशोर राठौड़ का कहना है कि स्कूलों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे बस चालकों को नियमों की पालना करने के लिए पाबंद करें।

राज्य सरकार के आदेश की अवहेलना, सोमवार से आरटीओ करेगा कार्रवाई

इन नियमों की पालना जरूरी

{ बच्चों को लाने-ले जाने वाली मिनी सिटी बस का नियमानुसार पंजीयन, परमिट लाइसेंस होना चाहिए।

{चालक के पास कम से कम 5 वर्ष वाहन चलाने के अनुभव वाला लाइसेंस होना चाहिए।

{वाहन में बच्चों के उतरने-चढ़ने के लिए सीढ़ियां होनी चाहिए। साथ ही मदद के लिए स्टाफ या कंडक्टर भी होना चाहिए।

{बच्चों के बैग वाटर बॉटल रखने की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। फर्स्ट एड बाक्स होना भी अनिवार्य है।

(इन नियम-कायदों को पूरा करने वाली मिनी सिटी बस को सिटी ट्रांसपोर्ट के साथ ऑथोराइजेशन सर्टिफिकेट दिया जाता है।)