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50 सीटर बस में 125 स्टूडेंट्स, लोडिंग जीप में छत तक भरकर स्कूल आते हैं

7 वर्ष पहले
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अभियान चलाकर करते हैं कार्रवाई...

देचू/ बिलाड़ा/बाप | हजारोंस्टूडेंट्स अपने गांव-कस्बों में हायर स्कूल या विषय होने, बालवाहिनियों सीमित साधनों के चलते जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचते हैं। हर मौसम में ये स्टूडेंट्स लोडिंग जीप, पिकअप बस में ठूंस-ठूंसकर भरने के बाद छत पर बैठकर मजबूरी में सफर करते हैं।

देचू से छात्र बोलेरो, पिकअप और टेंपों के अंदर तिल बराबर जगह भी नहीं बचने पर छत के हर इंच पर बिठाए जाते हैं। खतरे को जानने के बाद भी प्रशासन ही कुछ कर रहा और अभिभावक जागरूक हैं। बाप कस्बे में तो सुबह 50 सीटर बस में अंदर और ऊपर मिलाकर 125 तक यात्री होते हैं। इनमें ज्यादातर 10 से 15 साल के स्टूडेंट होते हैं।

पीपाड़ सिटी, बीरावास खेजड़ला से तो चलनेवाली रोडवेज बसों में भी यही हाल रहता है। इन गांवों के स्टूडेंट्स को हायर स्टडी कॉमर्स-साइंस पढ़ने के लिए बिलाड़्ा तक आना होता है। गड्ढों से भरी सिंगल रोड पर तूफानी स्पीड कभी भी अनहोनी कर सकती है।

कंटेटफोटो : देचूसे प्रकाशजैन, बापसे रमनदर्जी औरबिलाड़ा से चेतनकुमारमालवीय।

तमाम दावों भरपूर स्टाफ बजट के बाद भी शिक्षा विभाग गांव-कस्बों में हायर स्कूल या सभी सब्जेक्ट उपलब्ध नहीं करवा पाया है। स्कूल प्रशासन वाहनों की व्यवस्था नहीं कर पाता। परिवहन विभाग किसी हादसे के बाद ही फौरी कार्रवाई करता है। यहां तक कि पेरेंट्स भी अपनी मजबूरी बताकर बच्चों को जोखिम भरे सफर पर भेजते हैं। इसी के चलते गिनी-चुनी छात्राएं हीं आगे की पढ़ाई के लिए जाती हैं।

^ग्रामीण इलाकों में बालवाहिनियों में निर्धारित से अधिक संख्या में बच्चों को बिठाने वाले वाहनों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करते हैं। गत दिनों 10 से अिधक ऐसे वाहनों का चालान भी किया था। संबंधित क्षेत्र में पुलिस भी कार्रवाई करती है। बालवाहिनियों का पंजीयन जोधपुर कार्यालय से होता है। इसलिए फलौदी क्षेत्र में वाहनों की संख्या बताना मुश्किल है। एलपी गौड़, जिलापरिवहन अधिकारी, फलौदी

शिक्षा, परिवहन विभाग, पेरेंट्स सब शािमल