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स्वाइन फ्लू मरीज के घर जाकर इलाज करें: न्याय मित्र
सरकारी बंदोबस्त की दी जानकारी | राज्यसरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने कोर्ट को सरकार के स्तर पर स्वाइन फ्लू को रोकने के लिए किए गए बंदोबस्त की जानकारी दी। पंवार ने बताया कि सभी हॉस्पिटल में दवाइयां पर्याप्त है तथा राज्य स्तर, संभाग स्तर तथा जिला स्तर पर अलग-अलग मॉनिटरिंग कमेटी गठित की गई है। स्कूलों में प्रार्थना पर रोक लगा दी गई हैं। जबकि याचिकाकर्ता रामरख व्यास की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एमसी भूत ने स्वाइन फ्लू पीड़ितों का इलाज हॉस्पिटल की बजाय टीबी हॉस्पिटल में बनाए संक्रामक रोग भवन में किया जाना चाहिए।
इंफेक्शन डिजीज इंस्टीट्यूट में संसाधन नहीं | न्यायमित्र ने कहा कि चेस्ट हॉस्पिटल में इंफेक्शन डिजीज इंस्टीट्यूट तो बना हुआ है, लेकिन वहां संसाधन है स्टाफ।
डाटापर रिसर्च कर तैयारी करें| उन्होंनेसुझाव दिया कि रोज स्वाइन फ्लू से मरने वाले लोगों के डाटा पर रिसर्च कर भविष्य में नियंत्रण के प्रयास होने चाहिए।
लीगल रिपोर्टर. जोधपुर | हाईकोर्टमें वरिष्ठ न्यायाधीश गोविंद माथुर जस्टिस जयश्री राठौड़ की खंडपीठ के समक्ष गुरुवार को स्वाइन फ्लू मामले की सुनवाई हुई। जिसमें हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त न्याय मित्र अधिवक्ता विकास बालिया ने कहा कि हृदय रोग सहित कई अन्य रोगों के लिए सरकारी निजी अस्पतालों के स्तर पर तो इलाज में विशेषज्ञता है, लेकिन स्वाइन फ्लू सहित अन्य छूत की बीमारियों के इलाज के लिए किसी तरह की विशेषज्ञता नहीं है। इस दिशा में भी सरकार को सोचने की जरूरत है। तेजी से फैल रहे स्वाइन फ्लू के मामले में हो यह रहा है कि पीड़ित 100-50 किलोमीटर ट्रेन या बस के जरिये अपना इलाज कराने के लिए हॉस्पिटल रहे हैं, जो इस सफर के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को स्वाइन फ्लू से पीड़ित कर रहे हैं। ऐसे में डॉक्टर या रेपिड रिस्पांस टीम को खुद स्वाइन फ्लू रोगी के पास जाकर इलाज करना चाहिए, ताकि अन्य लोग उसकी चपेट में नहीं आए। पीड़ित की केयर भी ठीक ढंग से हो सके।