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स्कूल में बच्चों ने चिढ़ाया, फिर भी टीचर ने उसे ही डांटा, पंखे से झूल गई

7 वर्ष पहले
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भदवासियाक्षेत्र में गुलजार नगर स्थित संध्या शिक्षण संस्थान में नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा 14 वर्षीय पिंकी ने गुरुवार शाम अपने घर में पंखे से झूल कर खुदकुशी कर ली। उसके बैग से मिले सुसाइड नोट से सामने आया है कि साथ पढ़ने वाले एक छात्र ने उसका कोई उपनाम रख दिया था और बच्चे उसे उस नाम से चिढ़ाते थे। पिंकी ने इस बात की शिकायत अपने शिक्षक उम्मेद सिंह से की तो उन्होंने उलटे उसे ही डांट दिया। इसके बाद पिंकी ने स्कूल संचालक मदनलाल सुथार से शिकायत की, लेकिन उन्होंने भी उसकी गलती बताई तो उसने घर आकर माता-पिता से इस स्कूल में नहीं पढ़ने की बात कही। तीन दिन तक स्कूल भी नहीं गई। इस पर उसके पिता गुलाबराम टीसी कटवाने स्कूल गए। वहां संचालक ने इसे मामूली बात बताते हुए उन्हें पिंकी की पढ़ाई अपनी स्कूल में जारी रखवाने को राजी कर लिया। पिता भी मान गए और तीन माह की अग्रिम फीस जमा करा दी, लेकिन पिंकी ने दुबारा उसी स्कूल की बजाय मौत को चुन लिया।

पिंकी ने सुसाइड नोट में लिखा कि उसने किन परिस्थितियों में यह कदम उठाया।

परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने की स्कूल संचालक से पूछताछ

गुरुवार शाम पिंकी घर में पंखे से झूलती हुई मिली तो परिजनों ने महामंदिर थाना पुलिस को सूचना दी। पहले तो परिजनों ने कोई कार्रवाई नहीं करने और बिना पोस्टमार्टम शव लेने की बात कही, साथ ही रात होने के कारण बॉडी मोर्चरी में रखवा दी। इसके बाद घर में उसका बैग चैक किया तो सुसाइड नोट मिला। इस पर उन्होंने स्कूल संचालक पर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने शुक्रवार को पोस्टमार्टम करवा कर शव परिजनों को सौंप दिया, साथ ही पूछताछ के लिए स्कूल संचालक को बुलाया।

पिंकी तीन दिन से कर रही थी स्कूल नहीं जाने की जिद, पिता टीसी कटवाने गए तो संचालक ने समझा कर जमा करवा ली फीस

चिढ़ाने पर छात्र से हुआ था झगड़ा, टीचर ने भी उपनाम लेकर चिढ़ाया

सुसाइडनोट के अनुसार उपनाम लेकर चिढ़ाने पर पिंकी का एक छात्र से झगड़ा हुआ था। बात शिक्षक उम्मेद सिंह तक पहुंची तो उन्होंने पिंकी को ही डांटते हुए सब बच्चों के सामने उपनाम लेकर उसे चिढ़ाया। इस पर स्कूल संचालक मदनलाल सुथार से शिकायत की तो उन्होंने भी उसे ही गलत ठहराया। इस पर पिंकी ने खुद को इतना अपमानित महसूस किया कि इस स्कूल में ही नहीं पढ़ना चाहती थी और जब पिता अग्रिम फीस जमा करवा आए