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शिक्षक हैं नहीं, छात्राएं खुद ले रहीं क्लास

7 वर्ष पहले
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मैंने तो ऐसे कोई निर्देश नहीं दिए

^अबटीचर की कमी तो ऐसे ही रहेगी। हां, कुछ हद तक तो मामला सुधारा जा सकता है, लेकिन समस्या तो बनी रहेगी। इस समस्या को छुपाने जैसी भी बात नहीं और मैंने शिक्षा अधिकारी को ये सब मामला छुपाने के कोई निर्देश नहीं दिए। टीचर्स की कमी स्कूलों में है, यह सभी को पता है। अब शिक्षा अधिकारी बताने से इंकार क्यों कर रही है, ये मुझे नहीं पता।

ओंकारसिंह, िनदेशक,माध्यमिक शिक्षा, बीकानेर

मैं कहां से लाऊं टीचर : प्रिंसिपल

अपनीलाड़ली बेटियों की पढ़ाई नहीं होने की जानकारी अभिभावकों को मिली तो कई अभिभावक सोमवार को स्कूल पहुंचे। उन्होंने अपनी परेशानी स्कूल की प्रिंसिपल शशि वैष्णव को बताई तो उन्होंने कहा कि मैं इसकी जिम्मेदार नहीं हूं, मुझे जो काम मिला है, वही कर सकती हूं। जब टीचर ही नहीं है तो बच्चों को कुछ ना कुछ ताे करना ही पड़ेगा।

अभिभावक पहुंचे तो प्रिंसिपल बोली: मैं क्या करूं?

जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपते अभिभावक।

किसान कन्या बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में 11वीं की प्रिया अपनी क्लासमेट्स को मैथ्स के सवाल समझाती हुई। फोटो:पूरण सिंह

निर्देश हैं, ज्यादा नहीं बता सकती: जिला शिक्षा अिधकारी

मैंतो डायरेक्टर को केवल लिखकर बता सकती हूं और कुछ भी नहीं कर सकती। मुझे निदेशक ओंकार सिंह ने ज्यादा जानकारी देने के लिए मना किया है, इसलिए मेरे हाथ में कुछ नहीं। अगर किसी की नजर में कोई सक्षम एकाउंट्स और मैथ्स पढ़ाने वाला हो तो बताओ, मैं बात करके उसे लगवाती हूं। टीचर की कमी के हालात तो पूरे राजस्थान में ही ऐसे ही हैं, मैं कुछ नहीं कर सकती। यहां कोई तो टीचर है, कुछ स्कूलें तो ऐसी हैं जहां केवल एक ही टीचर सब कुछ पढ़ा रहा है। इसलिए तसल्ली रखो, समस्या तो समय पर ही सुलझेगी।

ट्यूशन का पैसा कहां से लाएं?

अभिभावकडूंगरसिंह ने बताया कि मेरी बेटी 12वीं में पढ़ रही है। स्कूल में टीचर नहीं है इसलिए मजबूरन कोर्स पूरा कराने के पांच हजार रुपए देकर ट्यूशन पर भेजना पड़ रहा है। इतने पैसे कहां से लाकर दूं? इसी तरह कृपालसिंह ने कहा कि मेरे पिता दो बच्चों को ट्यूशन पर नहीं भेज सकते इस कारण मैं दोस्तों से पढ़ रहा हूं और 11वीं में पढ़ रही बहन को ट्यूशन पर भेजा है ताकि उसका कोर्स पूरा हो सके। शांति देवी और हेमलता की बेटियां 11वीं में पढ़ती हैं और उन्हें टयूशन के प