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शुष्क क्षेत्रों में फैलने वाली बीमारियों पर रिसर्च के लिए 15 एमओयू
मरुस्थलीयआयुर्विज्ञान संस्थान की ओर से चल रहे तीन दिवसीय राजस्थान कॉन्क्लेव के पहले दिन रविवार को विभिन्न संस्थाओं के साथ शुष्क क्षेत्रों की बीमारियों के रिसर्च रोकथाम के लिए एमओयू साइन किए गए। इस अवसर पर डीएमआरसी से निदेशक जीएस टूटेजा, आईसीएमआर के डायरेक्टर जनरल वीएम कटोच और प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार नियोजन के एडिशनल डायरेक्टर राधेश्याम छीपा सहित कई वैज्ञानिक, प्राचार्या और सीएमएचओ मौजूद रहे। कार्यक्रम में डीएमआरसी की ओर से 15 एमओयू साइन किए गए। इन एमओयू के बाद रिसर्च में फंडिंग, तकनीकी मदद डीएमआरसी की ओर की जाएगी। ताकि मरुस्थलीय क्षेत्रों में फैलने वाली बीमारियों के साथ बुजुर्गों में होने वाले हड्डी रोग, महिलाओं में स्तर कैंसर और परिवार नियोजन के तरीकों के कम होते प्रभाव आदि पर अनुसंधान हो सकें। इसके अलावा मलेरिया और अन्य रोगों पर भी रिसर्च की जाएगी। जैसलमेर जिले पर विशेष तौर पर ध्यान दिया गया है, करीब चार से पांच एमओयू होने से जैसलमेर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। साथ ही उदयपुर और सहरिया आदिवासियों पर भी शोध होगा। कार्यक्रम में जेएनवीयू के साथ स्तर कैंसर और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद यूनिवर्सिटी के साथ औषधीय पौधों के अध्ययन पर होने वाले एमओयू पर साइन नहीं हो सकें। दोनों संस्थाओं की ओर से रजिस्ट्रार नहीं आए, लेकिन डीएमआरसी के वैज्ञानिक डॉ. मुरली माथुर ने बताया कि शाम तक साइन हो जाएंगे।
{ नए विषयों पर रिसर्च। { विषय विशेषज्ञों के साथ पीएचईडी करने का मौका
{ रिसर्च के लिए जरूरी फंड की मदद { शोध के लिए तकनीकी मदद
{ ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां
क्या मिलेगा फायदा
{ जैसलमेर जिले में मलेरिया के लिए वास्तविक स्वास्थ्य मैनेजमेंट प्रणाली का संचालन।
{कीटनाशक इलाज के लिए जाल का उपयोग रेगिस्तान क्षेत्र में मलेरिया संचरण के खिलाफ रक्षा के लिए काम।
{रेगिस्तान क्षेत्र में रहने वाली महिलाओं के बीच स्तन कैंसर, स्वयं परीक्षा के तौर पर एक स्वीकृत मॉडल तैयार करने।
{हड्डी रोग के साथ रेगिस्तानी इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों के स्वास्थ्य पोषण की स्थिति।
{ग्रामीण और शहरी इलाके में रहने वालों को पोषण तत्वों की शिक्षा देना और स्वास्थ्य का परीक्षण।
{सक्रिय स्क्रीनिंग के अध्ययन तपेदिक की संयुक्त पंजीकृत रूप से