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डाउनलोड करेंजोधपुर. आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को सुलभ बनाने और प्रदेश के हर क्षेत्र में रहने वाले लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए शुरू की गई 108 एंबुलेंस सेवा सुधरने का नाम नहीं ले रही है। हालात यह हैं कि प्रदेश की ज्यादातर एंबुलेंस बिना ऑक्सीजन और बिना दवाओं व उपकरणों के चल रही है। इस संबंध में एनआरएचएम के परियोजना निदेशक ने भी कंपनी को नोटिस देकर व्यवस्थाएं सुधारने को कहा, लेकिन उस पर अमल अब तक नजर नहीं आ रहा है। हैरानी की बात है कि सेवा प्रदाता जीवीके ईएमआरआई के स्टेट हैड खुद यह स्वीकार कर रहे हैं कि प्रदेशभर में औसतन हर रोज 30-40 एंबुलेंस ऑफ रोड रहती है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने जीवीके ईएमआरआई को 522 एंबुलेंस संचालन के लिए सौंपी। जोधपुर में शहरी और ग्रामीण इलाकों में कुल 25 एंबुलेंस हैं। इनके संचालन में खामियों के संबंध में शिकायतें सामने आने के बाद एनआरएचएम के परियोजना निदेशक यूडी खान ने गत 18 दिसंबर को जीवीके को नोटिस भेजा।
कर्मचारियों से राशि वसूलना शर्तों का उल्लंघन
> कर्मचारियों से 8500 रुपए और 5000 रुपए सिक्यूरिटी के नाम पर वसूले जाने पर भी विभाग ने आपत्ति जताई है। विभाग के अनुसार कंपनी को सरकार की ओर से किए जा रहे भुगतान की राशि में यह राशि पहले से ही शामिल है। कर्मचारियों ने यह राशि वसूलना शर्तों का उल्लंघन है।
> एंबुलेंस पर कर्मचारियों से लगातार 7 दिन तक काम लेने, निर्धारित 8 घंटे से अधिक समय तक काम करवाने पर आपत्ति जताते हुए विभाग ने ईएमटी के लिए तय वेतन 7500 रुपए और पायलट के लिए निर्धारित 7000 रुपए का भुगतान करने और 8 घंटे से अधिक काम करवाने पर श्रम विभाग के नियमों की पालना करने के निर्देश दिए।
> नोटिस में 81 एंबुलेंस के ऑफ रोड होने, 92 एंबुलेंस में अपर्याप्त दवा होने और 30 एंबुलेंस में स्टाफ पूरा नहीं होने का जिक्र भी किया गया है। अधिक समय तक ऑफ रोड रहने की स्थिति में कंपनी से पैनल्टी वसूलने का भी प्रावधान शर्तों में किया गया है।
किसी में उपकरण खराब तो किसी में पट्टी तक नहीं
भास्कर टीम ने जोधपुर शहर में चल रही कई एंबुलेंस की पड़ताल की तो कई गंभीर खामियां नजर आईं। बासनी, फिदूसर, बनाड़, रातानाडा सहित कई अन्य एंबुलेंस में आपातकालीन परिस्थितियों में उपयोग लिए जाने वाले उपकरण ही खराब मिले। इसी तरह, इन्हीं गाडिय़ों में एक-एक पट्टी ही मिली तो कुछ में पट्टी और पूरी दवा नजर ही नहीं आई। खेजड़ली में चलने वाली गाड़ी लंबे समय से हादसे के बाद खराब पड़ी है। ओसियां लोकेशन की गाड़ी का इंजन सीज होने की वजह से खटारा हालत में है। लोहावट में उद्घाटन करने के बाद नई गाड़ी को ओसियां में तैनात किया गया है। सूत्रों के अनुसार कई गाडिय़ों में चालक अनट्रेंड होने का खामियाजा भी मरीजों को भुगतना पड़ता है। बासनी लोकेशन की एंबुलेंस के हालात तो बेहद गंभीर है। इसमें लगी सेक्शन मशीन, प्लस ऑक्सीमीटर, बीपी इंस्ट्रूमेंट, ऑक्सीजन पाइप लाइन, ग्लूको मीटर सहित सभी मेडिकल उपकरण खराब पड़े हैं। एंबुलेंस की स्टेपनी भी गाड़ी के अंदर पड़ी है, जो कि गाड़ी के नीचले हिस्से में होनी जरूरी है। इस गाड़ी का इंजन तो चलता है, लेकिन गीयर बॉक्स खराब स्थिति में है।
पुरानी संभाल नहीं पा रहे, और नई थमाने की तैयारियां
जोधपुर दौरे पर आए 108 आपातकालीन सेवा कर्मचारी एकता यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि जीवीके ईएमआरआई को अब तक सरकार ने 522 एंबुलेंस संचालन के लिए सौंप रखी है। जीवीके भी पुरानी कंपनी की तर्ज पर काम कर रही है। इससे हालात और अधिक खराब हुए हैं। इसके बावजूद भी सरकार कंपनी को 50 और नई एंबुलेंस सौंपने की तैयारी कर रही है। कंपनी कर्मचारियों से सिक्यूरिटी के नाम पर अब तक करोड़ों रुपए अनधिकृत तरीके से वसूल कर चुकी है, जो कि सीधा-सीधा आरएफपी शर्तों उल्लंघन है।
हां, एवरेज 30-40 एंबुलेंस ऑफ रोड रहती है...
जीवीके ईएमआरआई के स्टेट हैड हिरेन भट्ट के अनुसार कई एंबुलेंस खराब स्थिति में है। सरकार कई गाडिय़ां ठीक करवा नहीं रही है। यही वजह है कि स्टेट में एवरेज हर रोज 30-40 एंबुलेंस ऑफ रोड रहती है। इन्हें बारी-बारी से रिपेयर करवा रहे हैं। एनआरएचएम से मिले नोटिस के बारे में भट्ट ने कहा कि यह कंपनी और सरकार के बीच का मैटर है, इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
सौंपने के बाद भी नहीं चल रही है तो कंपनी जिम्मेदार
एनआरएचएम के परियोजना निदेशक यूडी खान का कहना है कि विभाग ने जीवीके को 522 एंबुलेंस सौंप रखी है। इसके बाद भी कई एंबुलेंस ऑफ रोड रहती है तो इसके लिए कंपनी जिम्मेदार है। हम उनको दिए जाने वाले भुगतान में से कटौती भी करते हैं। कंपनी को दिए गए नोटिस का फिलहाल जवाब नहीं मिला है। खान के अनुसार संचालन शर्तों में मुख्य रूप से सभी एंबुलेंस का चलना और प्रत्येक एंबुलेंस के 5 ट्रिप होने की अनिवार्यता है। इन शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई का प्रावधान है और कई बार हमने कंपनी के भुगतान राशि में कटौती भी की है।
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