जोधपुर. नाबालिग छात्रा के यौन शोषण के मामले में जेल में बंद आसाराम के छिंदवाड़ा स्थित गुरुकुल में छात्रावास की वार्डन शिल्पी तथा सेवादार शिवा के जमानत आवेदन पर हाईकोर्ट ने यह कहते हुए सुनवाई करने से इनकार कर दिया कि पहले वे निचली अदालत में चार्ज बहस पूरी करें। बाद में जमानत आवेदन पर सुनवाई करेंगे। यह आदेश न्यायाधीश निर्मलजीत कौर ने शुक्रवार को प्रार्थी आरोपी के अधिवक्ता महेश बोड़ा व उनके सहयोगियों की मौजूदगी में देते हुए अगली सुनवाई की तिथि 30 जनवरी को तय की।
अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार ने कहा कि बचाव पक्ष ने पहले निचली अदालत में प्रसंज्ञान लिए जाने पर हाईकोर्ट में निगरानी याचिका दायर कर चार्ज बहस नहीं करने का कारण बताया था और बाद में अभियोजन पक्ष ने एक ही दिन में बहस पूरी कर ली। बचाव पक्ष पिछले चार दिन से लगातार बहस को लंबित किए जा रहा है।
शिवा शिल्पी की ओर से चार्ज बहस नहीं हुई पूरी
हाईकोर्ट की ओर से शिवा और शिल्पी के जमानत आवेदन पर सुनवाई टालने के बाद अपराह्न जिला एवं सत्र न्यायालय में हुई चार्ज बहस में इन दोनों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश बोड़ा व सुषमा धारा ने आरोपियों के खिलाफ पेश चार्ज शीट में प्रदर्शित कॉल डिटेल पर बहस की। बहस शुक्रवार को भी अधूरी रही, जो कि शनिवार को जारी रहेगी।
सेशन न्यायाधीश (जोधपुर जिला) के आदेशानुसार आसाराम की बीमारी के इलाज के लिए जेल प्रशासन ने करवड़ स्थित आयुर्वेद विवि में उपचार शुरू करवाया। इसके तहत बोर्ड के सदस्य मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ.अरुण त्यागी, पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ.महेश शर्मा व डायटीशियन डॉ.जयसिंह ने उनका एक्स-रे लिया। इस दौरान बोर्ड ने उनको चिकनाहट वाली चीजें नहीं खाकर सादा भोजन लेने की सलाह दी। इसके अलावा आसाराम को पैर के दर्द और सिर दर्द (अनंत वात) दूर करने के लिए दवा लेने की सलाह दी है।
बोर्ड के अनुसार आसाराम का इलाज उनको भर्ती किए बिना भी किया जा सकता है। इसके लिए उनको दवाओं का सेवन नियमित करना होगा और खानपान का ध्यान रखना होगा। सर्वपल्ली डॉ.राधाकृष्णन आयुर्वेद विवि के कुलपति प्रो.राधेश्याम शर्मा ने बताया कि आसाराम का इलाज दो से तीन माह तक चलेगा। यहां दूसरी बार चैकअप किया गया है। इसमें बोर्ड द्वारा उनका एक्स-रे भी किया गया है। आसाराम को भर्ती करने जैसी बात नहीं है। उनका आउटडोर में उपचार संभव है।