जोधपुर.एएनएम भंवरी के अपहरण, हत्या व सबूत मिटाने के मामले में अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण मामलात की विशेष अदालत की ओर से गत वर्ष 4 अक्टूबर को सुनाए गए आदेश को चुनौती देने के लिए सीबीआई की ओर से दायर निगरानी याचिका हाईकोर्ट ने स्वीकार कर ली है।
विशेष अदालत ने इस मामले में दो आरोपियों लूणी विधायक मलखान सिंह के भाई परसराम विश्नोई और ओमप्रकाश को अपहरण व हत्या के आरोप से बरी कर दिया था। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने गवाहों के बयान लेने पर लगाई गई रोक हटाते हुए इसका निर्णय अधीनस्थ अदालत पर छोड़ दिया कि हाईकोर्ट में निगरानी याचिकाओं के लंबित रहते गवाही शुरू की जाए अथवा नहीं।
निगरानी याचिका पर बहस दो मई को पूरी हो गई थी। न्यायाधीश अतुल कुमार जैन ने सुनवाई पर निर्णय सुरक्षित रखते हुए अधीनस्थ अदालत में गवाहों के बयानों पर लगी रोक को भी बरकरार रखा था। तब अदालत में अभियोजन पक्ष सीबीआई की ओर से मुंबई से आए वरिष्ठ लोक अभियोजक ऐजाज खां, विशिष्ट लोक अभियोजक एसएस यादव व अशोक जोशी और सीबीआई के वकील पन्नेसिंह रातड़ी ने कहा था कि भंवरी के अपहरण मामले में सीबीआई की चार्जशीट में मलखानसिंह विश्नोई, उनकी बहन इंद्रा सहित फुफेरे भाई सोहनलाल और उसके पुत्र व भतीजे पर गंभीर आरोप थे। इसके बावजूद अधीनस्थ अदालत द्वारा परसराम व ओमप्रकाश को बरी कर दिया जाना विधिसम्मत नहीं है।