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भंवरी हत्याकांड : परसराम विश्नोई व ओमप्रकाश के खिलाफ हत्या का मुकदमा भी चलेगा

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने एएनएम भंवरी के अपहरण व हत्या के मामले में आरोपी परसराम विश्नोई व ओमप्रकाश विश्नोई पर भी अपहरण व हत्या का मुकदमा चलाने के लिए कहा है। न्यायाधीश अतुल कुमार जैन ने यह आदेश गुरुवार को सीबीआई की ओर से दायर याचिका को आंशिक तौर पर स्वीकार करते हुए दिए।

सीबीआई ने यह याचिका अजा-जजा मामलात की विशेष अदालत के 4 अक्टूबर 2012 के उस फैसले के खिलाफ दायर की थी जिसमें विशेष अदालत के तत्कालीन न्यायाधीश गिरीश कुमार शर्मा ने यह कहते हुए दोनों आरोपियों को भंवरी के अपहरण व हत्या के आरोप से मुक्त कर दिया था कि उनके खिलाफ अपहरण व हत्या के षडय़ंत्र में शरीक होने के कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। उसके बाद से दोनों जमानत पर रिहा चल रहे हैं। गौरतलब है कि परसराम इस मामले में मुख्य आरोपी पूर्व लूणी विधायक मलखानसिंह विश्नोई का छोटा भाई है।

जमानती अपराध के आरोप ही बचे थे
1.
विशेष अदालत ने परसराम के खिलाफ अपहरण व हत्या का आरोप हटाने का आदेश देते हुए सिर्फ आईपीसी की धारा 202 के तहत आरोप तय रखा। यह धारा अपराध घटित होने की जानकारी के बावजूद पुलिस को सूचना नहीं देने से संबंधित है और जमानती है। इसमें मात्र छह महीने की सजा का प्रावधान है।

2. ओमप्रकाश पर सिर्फ आईपीसी की धारा 201 के तहत सबूत नष्ट करने का आरोप तय रखा। इसमें तीन वर्ष के कारावास की सजा का प्रावधान है और यह अपराध भी जमानती है।

कल पेश होना होगा, याचिका रद्द तो जेल
हाईकोर्ट के आदेश के बाद परसराम व ओमप्रकाश पर भी जो आरोप हैं वे गैर जमानती हैं। इसलिए दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश होकर जमानत याचिका देनी होगी। विशेष अदालत खारिज करती है तो दोनों को जेल जाना पड़ेगा। वैसे विशेष अदालत में एक फरवरी को सभी आरोपियों को हाजिर होना है। यदि ये दोनों आरोपी हाजिर नहीं होते हैं तो उनकी जमानत जब्त कर गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है। इधर, बहन इंद्रा अब तक फरार त्न मामले की एक अन्य आरोपी मलखान व परसराम की बहन इंद्रा विश्नोई दो साल से अब तक फरार है।

सीबीआई बोली- लिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य
सीबीआई की ओर से डीएलए (भोपाल) ऐजाज खान, सीबीआई के सीनि. पीपी एसएस यादव, सीबीआई के रिटेनर काउंसिल पन्नेसिंह व सीनियर स्पेशल काउंसिल अशोक जोशी ने कहा कि चार्जशीट पर दोनों के विरुद्ध हत्या, अपहरण में लिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य हैं।

फोटो- परसराम विश्नोई