जोधपुर.जोधपुर डिस्कॉम व जोधपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने शहर के 100 किलोमीटर एरिया में तारों का जाल हटाते हुए 20 प्रमुख सड़कों को पोललेस कर दिया है। इस पर 63 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।
शहर की 13 अन्य सड़कें भी अगले तीन साल में पोललेस हो जाएंगी। करीब तीन साल पूर्व जोधपुर डिस्कॉम ने जोधपुर को पोललेस सिटी बनाने के लिए आरएपीडीआरपी के तहत करीब पौने तीन करोड़ रुपए की लागत से काम शुरू किया। उधर जेडीए ने भी सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने और इसमें बाधक बनने वाले पोल और तारों को हटाने का का काम शुरू किया जिस पर करीब 50 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।
ये इलाके हुए पोललेस
डिस्कॉम ने यहां किया काम: जालोरीगेट से बोम्बे मोटर चौराहा, बोम्बे मोटर चौराहा से एयरफोर्स, पावटा से मंडोर तक, बालसमंद रोड, चौपासनी हाउसिंग बोर्ड का कुछ भाग, न्यू पावर हाउस से रोटरी सर्किल तक।
जेडीए ने यहां किया काम: लाल सागर से गोकुलजी की प्याऊ, भदवासिया आरओबी से माता का थान, कमला नेहरू नगर, पीडब्ल्यूडी चौराहा से सेनापति भवन, सरदारपुरा ए, बी व सी रोड, आकाशवाणी से रूपनगर, ईएसआई रोड, प्रतापनगर टेंपो स्टैंड से अंध विद्यालय, नेहरू पार्क से गणोशाराम मालवीय मार्ग, रोटरी सर्किल से एमडीएमएच तक।
यहां से भी हटेंगे
जेडीए यहां करेगा काम :
सोजतीगेट से जालोरीगेट चौराहा, नैनी बाई मंदिर से उम्मेद स्टेडियम, आखलिया चौराहा से जैसलमेर बाईपास, चौपासनी, अणदाराम स्कूल से राजीव गांधी कॉलोनी वाया डालीबाई का मंदिर, सालासर हैंडलूम से पाललिंक रोड, भदवासिया से सारण नगर व बनाड़, पावटा बी रोड से लक्ष्मीनगर होते हुए मटकी चौराहा।
पैसा जेडीए का, काम डिस्कॉम का:
न्यू पावर हाउस से रोटरी सर्किल तक 11 केवी लाइन हटाने, बोरानाडा, सालासर हैंडलूम से पाललिंक रोड, चौपासनी फिल्टर हाउस से चौपासनी गांव तक, भदवासिया आरओबी से गुजरने वाली 33 केवी की लाइन, मिर्धा सर्कल से राम मोहल्ला, ज्योति बा फुले पार्क तक 33 केवी सप्लाई लाइन हटाने का काम जेडीए ने डिस्कॉम को पैसा देकर करवाया।
वॉल सिटी वैसी ही रहेगी
डिस्कॉम ने पहले वॉल सिटी को भी पोललेस बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन पुराने नक्शे के हिसाब से बने शहर में तारों का जाल इतना है कि इसे हटाना डिस्कॉम के लिए चुनौती बन गया। ऐसे में शहर के भीतरी भाग को पोललेस करने के बजाय वहां इंसुलेटेड कंडक्टर लगाने की योजना बनाई गई है। यह कार्य आरएपीडीआरपी के तहत होगा।
यूं मिली तारों से मुक्ति
तारों के जंजाल से मुक्ति दिलाने के लिए शहर में सबसे पहले गौरव पथ पर पोललेस का प्रयोग किया गया। तत्कालीन कलेक्टर नरेशपाल गंगवार ने वर्ष 2006-07 में सिविल एयरपोर्ट से लेकर बारहवीं रोड चौराहे पर बने गौरवपथ की 11 केवी व एलटी लाइन को पोललेस करवाया।
इसके बाद जोधपुर में आयोजित हुए राज्य स्तरीय स्वाधीनता दिवस समारोह के लिए राजकीय उम्मेद स्टेडियम, गुलाबसागर व घंटाघर क्षेत्र को पोललेस बनाया गया। इसके लिए भूमिगत 11 केवी के साथ एलटी केबल बिछाई गई। यही पर बॉक्स लगाकर लोगों का मेट्रो सिटी की तरह पहली बार कनेक्शन दिए गए। बाद में जालोरी गेट से पांचवीं रोड को पोललेस किया गया।
इस पूरी कवायद का फायदा यह
जेडीए शहर की सड़कों को फोर लेन कर रहा है। इसके लिए सड़कों के बीच में आने वाले पोल और तारों को हटाया जा रहा है। इससे डिस्कॉम को भी तारों के जाल से छुटकारा मिलेगा। शहर भी तारों के जाल और पोल से मुक्त हो जाएगा। वहीं घरों के ऊपर या पास से गुजरने वाले तार हटने से खतरा कम हो जाएगा। पोल हटने से सड़क हादसों की संख्या में भी कमी आएगी और ट्रैफिक सिस्टम भी सुधरेगा।
ये भी लाभ होगा: तारों के टूटने की समस्या नहीं रहेगी, नए जीएसएस बनने से लोड भी पूरा मिलेगा, फीडर छोटे होने से सप्लाई अच्छी मिलेगी, वर्तमान में तीन से चार किमी. लंबे तार एक किलोमीटर के दायरे में सिमट जाएंगे।
ये भी हुए काम : पोल हटाने के साथ लटकते तार हटाए गए। सड़कें चौड़ी की गई। डिवाइडर बनाकर उनमें पौधे और रोड लाइटें लगाई गई।
अब सुकून महसूस होता है
'शहर में पहले तारों का जाल नजर आता था। बाहर से कोई मेहमान भी आता था तो कहता था। इतना तारो का जाल है आपके शहर में, लेकिन अब ऐसा नहीं है। सरकार को इस ओर पहले कदम उठाना चाहिए था।'
-अनुराधा, सरदारपुरा
'पहले सड़कें सिकुड़ी हुई थी। रास्तों में लगे पोल और तारों का जाल हटने से शहर सुंदर दिख रहा है। ट्रेफिक भी ठीक हो गया है। चौपासनी से मंडोर तक पूरा शहर खुला-खुला नजर आता है। यह अच्छी बात है।'
-दिव्यांश परिहार, शहरवासी
33 सड़कें शामिल की हैं
'हमने शहर की 33 मुख्य सड़कों को फोरलेन करने के लिए पोल और तार हटाने का काम शुरू किया है। इसमें करीब डेढ़ दर्जन से अधिक सड़कों का काम पूरा हो गया है। शेष का काम अब होगा।'
-रमेश माथुर, एक्सईएन, जेडीए
'हालांकि शहर की सभी सड़कें पोललेस नहीं होगी, लेकिन इनमें से चुनिंदा को पोललेस किया जा रहा है। इससे सिस्टम में सुधार आएगा। बिजली की खपत कम होगी। तारों के टूटने की समस्या नहीं रहेगी और ट्रैफिक सिस्टम में भी सुधार होगा।'
-एके गुप्ता, एमडी, जोधपुर डिस्कॉम