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डाउनलोड करें. जोधपुर । दुनिया के मेले में गुम हुए दो शहरों की तरह जोधपुर जैसी एक ब्लू सिटी यहां से करीब 10 हजार किलोमीटर दूर अफ्रीका के देश मोरोक्को में मौजूद है। मोरक्को की शेफचैओएन सिटी बिलकुल हमारे शहर की तरह है। ऐसे ही नीले रंग में रंगे मकान, ब्रह्मपुरी जैसी पतली और ढलान वाली गलियां, 'चापों' से बनी सड़कें, घर के बाहर चबूतरियां और घंटाघर व आडा बाजार जैसे परंपरागत बाजार वाले इलाके।
दोनों शहरों में मकानों को नीले रंग से रंगने की परंपरा का कारण भी एक ही है, गर्मी। शेफचैओएन को भी पर्यटक ब्लू सिटी के रूप में देखने के लिए आते हैं। केंद्रीय संस्कृति मंत्री चंद्रेश कुमारी ने कहा है कि जोधपुर और शेफचैओएन में सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए वे मोरक्को सरकार से बात करेंगी।
राव जोधा ने 1459 में जोधपुर की स्थापना की तो इसके ठीक 22 साल बाद 1471 में मोरोक्को के शेफचैओएन शहर की खोज हुई। जोधपुर में लोगों ने गर्मी से बचने के लिए चूने में नील मिलाकर मकानों को रंगना शुरू किया था। शेफचैओएन में 1930 के करीब स्पेन से निकले यहूदियों ने गहरे नीले रंग का उपयोग शुरू किया था।
वहां यह भी मान्यता है कि आसमान का रंग नीला होने व मकानों को नीला रखने से ईश्वर की कृपा बनी रहती है।जोधपुर के ब्रह्मपुरी इलाके में नीले रंग के मकान ज्यादा हैं तो यहां के मकानों की बनावट भी मोरक्को के मेडिना इलाके से हू-ब-हू मिलती है। दोनों शहर कई हजार किलोमीटर दूर हैं, लेकिन बनावट में आश्चर्यजनक समानता है।
महिलाओं के पहनावे में भी एकरुपता दिखती है।
मोरोक्को के शेफचैओएन में मेडिना पुराना इलाका है। यहां बने मकानों के दरवाजे, घर में चढऩे की सीढिय़ां और शाम होते ही घर के बाहर बैठना जैसे नजारे बिलकुल ऐसे हैं, जैसे जोधपुर के भीतरी शहर में देखने को मिलते हैं। फोटो : शिव वर्मा, विकास बोड़ा
स्थापत्य कला, संस्कृति और मेहमानों की खातिरदारी के कारण जोधपुर पर्यटकों की पसंद है तो शेफचैओएन भी यूरोपियन टूरिस्ट की मनपसंद जगह है। टूरिज्म के लिहाज से शेफचैओएन में 200 होटल हैं तो जोधपुर में करीब 300 होटल। मोरक्को के शेफचैओएन से लकड़ी, लोहे व चमड़े के हैंडीक्राफ्ट आइटम एक्सपोर्ट होते हैं। मोरक्को की बीस फीसदी आय का जरिया यही इंडस्ट्री है। भारत में हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट के मामले में जोधपुर प्रमुख शहर है और यहां भी लकड़ी व लोहे के आइटम सर्वाधिक एक्सपोर्ट होते हैं।
लोकल मार्केट दोनों जगह एक जैसे
शेफचैओएन की पतली गलियों में छोटे-छोटे मार्केट हैं। स्थानीय स्तर पर बनने वाले कपड़े, रंगाई-छपाई, चमड़े के उत्पाद और वूलन गारमेंट पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहते हैं। जोधपुर में भी घंटाघर, आडा बाजार और खांडा फलसा जैसे लोकल और संकरी गलियों के मार्केट शेफचैओएन जैसे ही हैं।
उनकी अपणायत भी हमारे शहर की तरह
शेफचैओएन में टूरिस्ट को मेहमान की तरह रखा जाता है। वहां के पुराने शहर मेडिना में भी पेइंग गेस्ट हाउस बने हैं। टूरिस्ट स्थानीय लोगों के साथ उनके घरों में रहकर वहां की संस्कृति को करीब से जानते हैं। जोधपुर में भी टूरिस्ट को अपणायत के साथ घर में रखा जाता है और वह परिवार का हिस्सा बनकर रहता है।
ऊंचाई से देखो तो कोई अंतर नहीं
जोधपुर की ओल्ड सिटी और मोरक्को का शेफचैओएन इलाका, दोनों ही पहाड़ी पर बसे हैं तो दोनों शहर के आस-पास पहाड़ हैं। दोनों शहरों का विहंगम दृश्य देखने पर एक जैसा लगता है। पत्थरों के मकानों के झुंड में जितने मकान जोधपुर में नीले हैं, लगभग उतने ही शेफचैओएन में। स्थापना के लिहाज से जोधपुर 554 साल पुराना है तो शेफचैओएन 542 साल पुराना। जोधपुर शहर की जनसंख्या 12.64 लाख है तो शेफचैओएन की आबादी करीब 4.50 लाख है। जोधपुर पर्यटकों की पसंद है तो शेफचैओएन भी यूरोपियन टूरिस्ट की मनपसंद जगह है।
इस तरह अलग
नेशनल पार्क, रूरल टूरिज्म, हिल एडवेंचर। गर्म इलाके में वूलन प्रॉडक्ट का बड़ा मार्केट।भांग उत्पादन से पर्यटकों का आकर्षण।
इधर, फिल्म शूटिंग के लिए नीला हुआ स्पेन का शहर स्पेन के जुकर शहर में सोनी पिक्चर्स ने 2011 में फिल्म शूटिंग के लिए पूरे शहर को सफेद की जगह नीले रंग में रंगवा दिया। कंपनी ने ऑफर दिया था कि शूटिंग के बाद शहर को फिर से मूल रंग में बदल दिया जाएगा। इस शहर के 220 लोगों को यह रंग इतना पसंद आया कि उन्होने नीले रंग के घरों में रहना ही तय किया, बाकी शहर का रंग फिर से सफेद हो गया। शेफचैओएन में कुछ समय पहले ही सलमान खान की एक था टाइगर फिल्म की शूटिंग हुई थी।
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