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बच्चे बोले- बर्तन भी धोना पड़ता है, हमसे डाई और मालिश करवाती हैं मैम

6 वर्ष पहले
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जोधपुर. घोड़ों का चौक स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय जाटा बास नंबर एक में बुधवार को संबलन अभियान के तहत निरीक्षण था। हैड मास्टर चुनावी ड्यूटी पर थे। पीछे शिक्षकों में एेसा डर था कि हैड मास्टर का चार्ज आगे से आगे थमा कर सारे छुट्टी पर चले गए। निरीक्षण पर प्रोटोकॉल अधिकारी महेंद्रप्रताप सिंह को केवल पीटीआई ही उपस्थित मिला।
बच्चों से पढ़ाई के बारे में पूछा तो बोले- सर, मैडम हमसे अपने बालों में डाई और हाथ-पैरों में मेहंदी लगवाती हैं... कभी-कभी घर से मटर भी ले आती हैं, जो हमें छिलने के लिए देकर खुद आराम फरमाती हैं। स्कूल में पढ़ने का तो टाइम ही नहीं मिलता।
राउप्रा विद्यालय जाटा बास नं.1 के बच्चों की जुबानी
> घर से मटर लाती हैं, स्कूल में हमसे छिलवाती हैं
> मिड-डे मील के बड़े बर्तन भी हमें ही धोने होते हैं

अटक-अटक कर पढ़ रहे थे, लिखने में भी गलतियां
उपनिदेशक माध्यमिक गजरा चौधरी ने आदर्श रामावि चिचड़ली में जांच की। यहां पर 8वीं के बच्चे अंग्रेजी शब्द बता पा रहे थे। हालांकि उन्हें छठी-सातवीं कक्षा के बच्चों का स्तर न्यून लगा। बच्चे अटक-अटक कर किताबें पढ़ रहे थे। इधर, एडीईओ (विधि) अशोक विश्नोई ओसियां ब्लॉक की राउप्रावि मीरा की निंबड़ी स्कूल गए, जहां पर बच्चे सही तरीके से लिख-पढ़ नहीं पा रहे थे। कुछ ऐसा ही नजारा एडीईओ कैलाशदास स्वामी ने राप्रावि मूरलाई नाडी व भंवरलाल सुथार ने राउप्रावि मेघाणियों की ढाणी बेदू कलां में देखा। निरीक्षण में एसएमसी सदस्यों की बैठक भी हुई, जिसमें सदस्यों ने टीचर लगाने व स्कूल को क्रमोन्नत करने की मांगें रखी।
आगे की स्लाइड्स में पढ़ें टीचर्स के बारे में बच्चों ने क्या क्या बताया
नोट:- सभी स्लाइड्स में फाइल फोटो का प्रयोग किया गया है।