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तत्कालीन सिरोही कलेक्टर नरवानी को 2 साल की सजा

8 वर्ष पहले
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जोधपुर. भ्रष्टाचार निवारण मामलात की विशेष अदालत ने भ्रष्टाचार के एक मामले में सिरोही के तत्कालीन कलेक्टर को दो वर्ष का कठोर कारावास और पांच हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश एसके जैन ने सिरोही के तत्कालीन कलेक्टर एवं आबूपर्वत नगर पालिका के प्रशासक जीएस नरवानी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) (डी) की उपधारा 2 का अपराधी मानते हुए बुधवार को यह सजा सुनाई। सजा के बिंदु पर लोक अभियोजक बरकत अली का कहना था कि ऐसे मामले में नरमी का रुख नहीं अपनाया जाना चाहिए।

न्यायाधीश जैन ने फैसले में लिखा कि अभियुक्त ने कलेक्टर के पद की गरिमा को ठेस पहुंचा कर आपराधिक भ्रष्ट दुराचरण किया है। बाद में कोर्ट ने सजा को 30 दिन के लिए स्थगित कर दिया। सेवानिवृत्त हो चुके नरवानी इस दरम्यान हाईकोर्ट में जमानत के लिए आवेदन कर सकेंगे।

राजस्व मंडल में था विवाद लंबित: आरोपी नरवानी को इस बात की जानकारी थी कि एनओसी जारी किए जाने वाले खसरों की जमीन का विवाद राजस्व मंडल अजमेर में लंबित था। कलेक्टर ने आवासीय प्रयोजनार्थ उक्त भूमि को रूपांतरित किया। कुल भूमि 9 बीघा थी एवं नगरपालिका द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार उक्त भूमि का मूल्य 41 लाख 33 हजार 81 रुपए था।

तबादला होने के बावजूद जारी कर दी एनओसी

परिवादी भगवत सिंह ने 8 सितंबर, 1990 को आबू पर्वत के ग्राम हुटाई स्थित खसरा नंबर 287 व 289 को कृषि भूमि से आवासीय प्रयोजनार्थ रूपांतरित करने के लिए आवेदन किया था। इस दौरान नरवानी का स्थानांतरण दूसरी जगह हो गया। इसके बावजूद नरवानी ने द्वितीय शनिवार का अवकाश होने पर भी अपने पद का दुरुपयोग कर नगर पालिका आबू पर्वत का कार्यालय खुलवाया और आवेदन पत्र के बिना अधिशासी अधिकारी से कोई टिप्पणी प्राप्त किए और सही तथ्यों को नजरअंदाज कर अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इससे सरकार और नगरपालिका को आर्थिक हानि हुई।