जोधपुर. नगर निगम ने शास्त्री सर्किल पर फूड कोर्ट की दुकानों की नीलामी से मिलने वाली राशि में से 15 फीसदी हिस्सा मांगा तो जेडीए ने उलटे निगम में 19 करोड़ बकाया का हिसाब थमा दिया। जेडीए ने निगम को पत्र भेज कर कहा है कि यह राशि विकास कार्यों की विभिन्न योजनाओं के पेटे विकास शुल्क के रूप में ज्यादा दे दी गई थी। जेडीए आयुक्त बीआर चौधरी के अनुसार जेडीए ने नगर निगम को पिछले सात वर्षों में दिए गए विकास शुल्क का हिसाब लगाया, इसमें 19 करोड़ रुपए ज्यादा देना पाया गया।
जेडीए सात साल से निगम को दे रहा विकास शुल्क: निगम की आर्थिक हालत खराब होने पर वर्ष 2007 में राज्य सरकार ने यह निर्णय किया था कि तत्कालीन यूआईटी व बाद में जेडीए शहर में जो भी जमीन बेचेगा, उससे होने वाली आय की 15 फीसदी राशि विकास शुल्क के रूप में निगम को देनी होगी। इसके बाद से ही जेडीए 15 फीसदी राशि निगम को देता रहा है। गत दिनों जब जेडीए ने शास्त्री सर्किल पर फूड कोर्ट की दुकानों की बिक्री की सूचना जारी की, ताे महापौर रामेश्वर दाधीच ने यह कहते हुए विरोध किया था कि जेडीए नियम मुताबिक 15 फीसदी विकास शुल्क नहीं दे रहा है। इसके बाद जेडीए ने सात साल का हिसाब देखा। जेडीए आयुक्त के अनुसार इसमें 19 करोड़ रुपए निगम को ज्यादा देना सामने आया।
जेडीए-निगम के बीच गुम हुअा सर्किल विकास का एक्शन प्लान
{ जेडीए ने करीब एक साल पहले दो करोड़ के कार्यों की योजना बनाई
{ फूड कोर्ट की तीन दुकानों की नीलामी से करीब सवा करोड़ कमाए
{ क्षेत्राधिकार काे लेकर विवाद हुआ तो कहा पत्रावली निगम को सौंप दी
{ निगम ने कहा कि जेडीए से ऐसी कोई पत्रावली अभी तक नहीं मिली
इन सबके बीच जेडीए की नीयत पर सवाल खड़े करते हैं ये बिंदु
1. शास्त्री सर्किल निगम के क्षेत्राधिकार में आता है तो जेडीए ने प्लान क्यों बनाया?
2. प्लान बना लिया तो उस पर काम क्यों नहीं किया? पार्किंग की जमीन पर फूड कोर्ट कैसे बना लिया?
3. फूड कोर्ट की तीन दुकानें बेचने पर विवाद उठा तो इसका पैसा पत्रावली के साथ निगम को क्यों नहीं दिया?
4. जब सर्किल के विकास की पत्रावली निगम को सौंप दी तो अब फूड कोर्ट की चार दुकानें कैसे नीलाम कर रहा है?
विवाद के बीच लोग भुगत रहे परेशानी
{ शहर के एकमात्र हॉट स्पॉट शास्त्री सर्किल पर पार्किंग के काम आ रही जगह को फूड कोर्ट के बहाने बेचने से वहां पार्किंग की समस्या खड़ी हो गई है। लोग सड़कों पर वाहन खड़े करने को मजबूर हैं।
{ जमीन बेचने के बदले जेडीए को होने वाली आय में से 15 फीसदी हिस्सा निगम के खाते में जमा करवाने का नियम है, लेकिन जेडीए समय पर पैसा निगम में ट्रांसफर नहीं कर रहा। इससे सफाई जैसे काम भी पूरी तरह नहीं हो पा रहे।
{ फूड कोर्ट बनाने के लिए जेडीए ने करीब एक करोड़ रुपए खर्च किए, लेकिन यहां बनाई 17 दुकानों से जेडीए को लगभग छह करोड़ की आय होगी। यह पैसा निगम के खाते में जाता तो विभिन्न वार्डों में अटके विकास कार्य पूरे होते।