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कांग्रेस से एमएलए-एमपी चुनाव हारने वाले चुनेंगे पार्षद प्रत्याशी

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. नगर निगम चुनाव का बिगुल बज चुका है। एक तरफ विधानसभा व लोकसभा चुनाव में मात खाने वाली कांग्रेस निगम में लगातार चौथे बोर्ड का रिकॉर्ड बनाने की कवायद कर रही है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर जोरदार जीत के साथ सत्ता पर काबिज हुई भारतीय जनता पार्टी स्थानीय स्तर पर भी कांग्रेस को पटखनी देने के मंसूबे बांधे हुए है। दोनों ही दलों से संबंधित एक रोचक तथ्य है जो इन दिनों खूब कहा और सुना जा रहा है।
कांग्रेस में जो नेता टिकट तय करने में लगे हुए हैं, उन्हें खुद जीत का स्वाद चखे लंबा अरसा हो गया है। दूसरी ओर भाजपा के टिकट पर विधायक बनने वाले नेता कभी इतने पार्षदों को नहीं जिता सके कि निगम में उनकी पार्टी का बोर्ड बन सके। इन तथ्यों को लेकर भास्कर की पड़ताल-
कांग्रेस- चंद्रेश कुमारी, जाखड़, चंद्रभान, काबरा, अंसारी, भंडारी, जैफू खां सभी हारे, लेकिन निगम चुनाव में अहम भूमिका
1. जैफू खां- सूरसागर विस के 21 टिकट तय कर रहे हैं। दो बार ही चुनाव लड़ा, पहले फलौदी से चुनाव हारे, इस बार सूरसागर से।
2. सईद अंसारी- पार्टी ने तीन बार विस चुनाव में मौका दिया, हार गए। वे सभी 65 वार्ड के टिकट में हस्तक्षेप रख रहे हैं।
3. जुगल काबरा- प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। गहलोत ने इन्हें भी तीन बार मौका दिया, मगर जीते एक ही बार। शहर विस के 23 वार्ड के प्रत्याशी तय कर रहे हैं।
4. राजेंद्र सोलंकी- यूआईटी व जेडीए के चेयरमैन रहे। 1982 में पार्षद बने, 1994 में विस चुनाव हार गए। फिर कभी चुनाव नहीं लड़ा।
5. डॉ. चंद्रभान- निगम चुनाव में जोधपुर के प्रभारी हैं। कांग्रेस में आने के बाद एक बार मंत्री बने। मगर पिछले तीन विस चुनाव हारे हैं।
6. बद्रीराम जाखड़- जोधपुर से लोकसभा चुनाव हारे, बाद में पाली से सांसद बने। इस बार टिकट ही नहीं लिया, बेटी को उतारा। वह भी हार गई।
7. चंद्रेश कुमारी- हिमाचल प्रदेश में 40 साल का राजनीतिक सफर तय करने के बाद 2009 में जोधपुर की सांसद बनीं। मगर इस बार जोधपुर की जनता ने उन्हें रिकॉर्ड 4.94 लाख वोटों से हराया।
...इसलिए अंतिम मोहर गहलोत की
जोधपुर कांग्रेस में एक परंपरा बनी हुई है कि चाहे कोई भी चुनाव हो, उम्मीदवारों के बारे में अंतिम फैसला पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ही करते हैं। अब भी ऐसा ही हाेगा। पैनल गहलोत के पास जाएगा और वे ही समीक्षा कर टिकट देंगे।
भाजपा- डेढ़ दशक से दबदबा, फिर भी पिछले 3 निकाय चुनावों में हारी
डेढ़ दशक से जोधपुर शहर भाजपा का गढ़ है। सूरसागर विधायक सूर्यकांता व्यास लगातार तीसरी बार जीतीं, एक बार शहर से व दो बार सूरसागर से। पहले मोहन मेघवाल ने सूरसागर सीट पर कब्जा बनाए रखा। शहर विधानसभा से कैलाश भंसाली लगातार दूसरी बार जीते हैं। लोकसभा चुनाव में भी भाजपा का पलड़ा भारी रहा है। अभी गजेंद्रसिंह शेखावत रिकॉर्ड मतों से जीते हैं तो चंद्रेश कुमारी से पहले दो बार जसवंतसिंह विश्नोई सांसद रहे हैं। यानी पंद्रह सालों से दबदबा होने के बावजूद भाजपा निगम बोर्ड पर कब्जा नहीं कर पाई और लगातार तीन बार कांग्रेस ने बोर्ड बना लिया। इस तरह लोकसभा-विधानसभा में विनर होते हुए भी निगम में लूजर बने रहे।
विनर्स की पूअर परफाॅर्मेंस
सूरसागर- लगातार तीसरी बार भाजपा विधायक, पिछली बार 23 वार्ड में 9 सीटें मिलीं।
परफाॅर्मेंस 39 %
शहर- लगातार तीसरी बार भाजपा विधायक, लेकिन 21 वार्ड में से 10 सीटें मिलीं।
परफाॅर्मेंस 48 %
सरदारपुरा- लगातार तीसरी बार गहलोत विधायक, 21 वार्ड में से सिर्फ 3 सीटें।
परफाॅर्मेंस 14 %