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फ्रिज में रखे काजू के दो टुकड़े चुराए तो बच्चे को गर्म चिमटे से दागा

8 वर्ष पहले
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जोधपुर. प्रताप नगर यूआईटी कॉलोनी में रहने वाले एक संभ्रांत परिवार ने घर में 12 साल के बच्चे को बंधुआ मजदूर बना रखा था। मासिक पारिश्रमिक देना तो दूर उसे ठीक से खाना भी नहीं दिया जा रहा था। हद तो तब हो गई जब उस नासमझ बच्चे ने घर के फ्रिज में रखे काजू के दो टुकड़े चुराकर खा लिए। परिवार के लोगों ने इसकी सजा देते हुए मासूम को गर्म चिमटे से गर्दन और हाथ पर दागा। मासूम पर हो रहे इस अत्याचार की भनक आस-पड़ोस के लोगों को लगी तो पुलिस ने मंगलवार रात को दबिश देकर उसे मुक्त कराया। स्थानीय बाल कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने उस मासूम से पूछताछ की तो यह दर्दनाक कहानी सामने आई।

उल्लेखनीय है कि प्रताप नगर यूआईटी कॉलोनी निवासी वीरेंद्र जैन पुत्र हुलासचंद के घर पर दबिश देकर प्रताप नगर पुलिस ने एक बच्चे को मुक्त कराया था। मानसिक रूप से अपरिपक्व इस बालक से बाल कल्याण समिति के अधिकारी सरोज चौहान की मदद से बातचीत की गई। उसकी मनोदशा और हालात की जानकारी मिलने पर एडीसीपी (पश्चिम) सतीशचंद्र जांगिड़, एसीपी (प्रताप नगर) ललित शर्मा और प्रताप नगर थानाधिकारी विद्याधर डूडी ने भी विभिन्न कानूनी पहलूओं पर चर्चा की। तत्पश्चात अधिकारियों ने श्रम विभाग के अधिकारियों को भी सूचना देकर रिपोर्ट देने को कहा। इसके बाद पुलिस ने स्वप्रेरणा से आरोपियों के खिलाफ संगीन धाराओं में एफआईआर दर्ज की और वीरेंद्र जैन को गिरफ्तार कर लिया। प्रकरण की जांच के बाद पुलिस ने बुधवार को वीरेंद्र जैन की पत्नी की तलाश में उसके घर पर दबिश दी, लेकिन वो फरार हो गई। दूसरी ओर, सीडब्ल्यूसी चौहान के निर्देश पर पुलिस ने पीडि़त बच्चे का एमजीएच में मेडिकल करवाया। वीरेंद्र को न्यायालय ने एक दिन के पुलिस रिमांड पर सौंपा है।

निंबाहेड़ा का है मासूम

प्रारंभिक पड़ताल में सामने आया है कि पीडि़त बच्चा निंबाहेड़ा का रहने वाला है। दरअसल, वीरेंद्र की बहन का ससुराल वहीं पर है। करीब डेढ़-दो साल पहले वीरेंद्र ने उस बच्चे को एक चाय की थड़ी पर काम करते हुए देखा। बाद में बहन की मदद से उसने बच्चे के परिजनों से संपर्क साधा और उसे अपने साथ ले आया। चौहान के अनुसार उसके परिजनों के बारे में पता लगाया जा रहा है। तब तक उसे किशोर गृह में रखा जा रहा है।