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डाउनलोड करें1000 एकड़ में बन रहा अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) अपने आकार, लागत और भव्यता के कारण मेहरानगढ़ और उम्मेद भवन पैलेस के बाद जोधपुर का सबसे बड़ा भवन होगा। मेहरानगढ़ का महत्व तत्कालीन मारवाड़ राज्य की जनता की सुरक्षा के लिए था। उम्मेद भवन पैलेस राज्य में अकाल के बुरे वक्त में जन-जन को रोजगार देने के लिए बनाया गया। इसी तरह एम्स अब वर्तमान राज्य यानी राजस्थान में आम आदमी को स्वास्थ्य सेवा देने का सबसे बड़ा केंद्र बनने जा रहा है। जोधपुर के 554 साल के सफर के गवाह मेहरानगढ़ व उम्मेद भवन के बाद
एम्स है बिगेस्ट मैन मेड स्ट्रक्चर,...'आरोग्य' देगा एम्स
सुपर स्पेशिएलिटी मेडिकल सेवाओं के विस्तार के लिए लगभग 100 एकड़ में मेडिकल व नर्सिंग कॉलेज, 960 बेड का अस्पताल, ऑडिटोरियम, हॉस्टल और 167 आवास का काम चल रहा है। इसमें 500 वाहनों की भूमिगत पार्किंग भी हो सकेगी। मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुका है, चार माह में अस्पताल और साल के अंत तक नर्सिंग कॉलेज भी शुरू हो जाएगा।
जोधपुर का एम्स ज्ञान का वह मंदिर है जो शिक्षण, अनुसंधान व उपचार के उच्चतम मानकों को स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
-डॉ. संजीव मिश्रा, डायरेक्टर, एम्स जोधपुर
अकाल से उबारने को उम्मेद भवन
मारवाड़ में भीषण अकाल था, लोगों के पास खाने को अनाज तक नहीं था। महाराजा उम्मेदसिंह ने रोजगार देने के लिए 18 नवंबर 1929 में पैलेस की नींव रखी। सुपरवाइजर आर्किटेक्ट गोल्ड स्ट्रा को 1 हजार रु महीना मिलता था और मजदूरों को प्रतिदिन 50 पैसे। लगभग 26 एकड़ में फैला यह पैलेस 1944 तक पूरा हुआ। निर्माण में 94 लाख 51 हजार 565 रु. खर्च हुए थे।
26 एकड़ क्षेत्र में फैलाव,1929-44 तक चला निर्माण कार्य,5000 अकाल पीडि़तों ने बनाया,महफूज रखने को मेहरानगढ़
मेहरानगढ़ को सुरक्षा के लिहाज से ऊंची पहाड़ी पर बनाया था। राव जोधा ने 12 मई 1459 को किले की नींव रखी। किला समुद्रतल से 400 फीट ऊंचाई पर है। लगभग 5 किमी दायरे में फैले इस किले के मुख्य भवन की चौड़ाई 70 फीट व ऊंचाई 120 फीट है। जैसे-जैसे राजा सत्तासीन होते रहे, मोती महल, शीश महल, फूल महल आदि और विभिन्न पोल का निर्माण कराते रहे। जोधपुर का एम्स ज्ञान का वह मंदिर है जो शिक्षण, अनुसंधान व उपचार के उच्चतम मानकों को स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
-डॉ. संजीव मिश्रा, डायरेक्टर, एम्स जोधपुर
उम्मेद भवन की लालिमा सुबह के सूरज से मिले रंग से है, वैसे ही रंग इस शहर के लोगों के जीवन में भी है।
- रूडयार्ड किपलिंग, लेखक, द जंगल बुक।
मेहरानगढ़ जैसे दुर्ग दुनिया में कम ही बचे हैं जो आज भी मजबूती से खड़े हैं और अपना गौरव समेटे हुए है।ञ्ज
- गुल पनाग, पूर्व मिस इंडिया और एक्ट्रेस
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