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हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट आम आदमी को 10 दिन से, डीलर को 48 घंटे में

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. शहर में आम आदमी को अपने वाहन के लिए हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लेने में पसीना छूट रहा है। कंपनी के अधिकृत लोग सादे कागज पर वाउचरनुमा रसीद पर दस दिन आगे की तारीख देकर टरका रहे हैं। इसके बाद भी एक-दो चक्कर काटने पर नंबर प्लेट मिल रही है। दूसरी आेर वही नंबर प्लेट डीलर्स से दुपहिया वाहन के लिए 500 रुपए और कार के लिए 1000 से 1200 रुपए अधिक देने पर 48 घंटे में आसानी से मिल रही है।
ऐसे में डीलर्स और नंबर प्लेट बनाने वाली कंपनी की मिलीभगत से आम आदमी की जेब पर भार पड़ रहा है। नियमानुसार सभी को नंबर प्लेट कंपनी के आरटीओ कार्यालय स्थित काउंटर से 48 घंटे में उपलब्ध कराने का प्रावधान है। आरटीओ में रोजाना करीब दो सौ लोग चक्कर काट रहे हैं।
रसीद पर 10 दिन में आने को लिखा
चौपासनी रोड निवासी पूजा ने आरटीओ में एक्टिवा गाड़ी की नंबर प्लेट के लिए 27 नवंबर को आवेदन किया था। आरटीओ में कंपनी के एजेंट ने एक सादे कागज पर रसीद दी। इस रसीद पर दस दिन आगे की तारीख दी, लेकिन इसके भी दो दिन बाद नंबर प्लेट मिली।
डीलर ने 48 घंटे में दी नंबर प्लेट
भीतरी शहर निवासी महेंद्र ने शोरूम से मोटर साइकिल खरीदी थी। डीलर ने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट अगले 48 घंटे में अपने शो रूम से उपलब्ध करवा दी। इसके लिए डीलर ने 570 रुपए लिए, लेकिन आरटीओ में भीड़ में धक्के खाने और समय खराब होने से बच गया।
कंपनी की सफाई- डीलर एक साथ बनवा लेता है
विभाग नंबर की पूरी सीरिज डीलर को जारी करता है। डीलर अपनी सीरिज की नंबर प्लेट बनवा कर रख लेते हैं। इसके बाद जैसे-जैसे गाड़ी बिकती है, प्लेट ग्राहक को दे देता है। आरटीओ में इसलिए देरी होती है, क्योंकि आरटीओ से रसीद काटने के बाद नंबर आवंटित होते हैं। इसके बाद प्लेट बनाने का ऑर्डर दिया जाता है, तब कहीं प्लेट बनती है। -दिनेश यादव, सुपरवाइजर, रियल मेजोन
आरटीओ ने कहा- कंपनी के प्रतिनिधि को तलब किया है
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट एलॉटमेंट में अव्यवस्थाओं की शिकायत मिली है। इसके लिए कंपनी के सुपरवाइजर को बुलाया है। उसने शुक्रवार को आने का कहा था, लेकिन नहीं आया। अब सोमवार को आएगा। उसको व्यवस्था सुधारने को कहा जाएगा। इसके बाद भी नहीं माना तो मुख्यालय को रिपोर्ट भेजेंगे, ताकि व्यवस्था ठीक हो सके। -एमएल नेहरा, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, जोधपुर