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सरकारी समीक्षा: सरकार को याद आया जोधपुर, ठप कार्यों की समीक्षा

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. शहर में करीब एक साल से कमोबेश सभी बड़े विकास कार्य ठप पड़े हैं, लेकिन राज्य सरकार को नगर निगम चुनाव से ठीक पहले जोधपुर की याद आई तो जेडीए के कार्यों की समीक्षा करने नगरीय विकास विभाग (यूडीएच) के उप सचिव राकेश शर्मा को गुरुवार को दो दिवसीय दौरे पर जोधपुर भेज दिया।
जब भास्कर ने उनसे पूछा कि बीते दस माह से जोधपुर शहर के लोग टूटी व बदहाल सड़कों से परेशान हैं, तो उनका कहना था कि शहर की टूटी व अधूरी पड़ी सड़कें सुधारने के लिए फंड देने का निर्णय राज्य सरकार करेगी। वे तो जेडीए में आय बढ़ाने व लैंड बैंक बनाने सहित छह कार्यों की समीक्षा करने आए हैं।
पांच घंटे जिन मुद्दों की समीक्षा की, वे तो 10 माह से जस के तस हैं
शर्मा ने गुरुवार को पांच घंटे से ज्यादा समय तक जेडीए अफसरों के साथ बैठ कर विभिन्न मुद्दों की समीक्षा की। भास्कर ने पड़ताल की तो सामने आया कि ये ऐसे मुद्दे हैं जो दस माह से जस के तस हैं। सवाल यह है कि सिर्फ समीक्षा से क्या हासिल होना है?
1. रिक्तिया भैरूजी मल्टी लेवल आरओबी| काम 35 फीसदी पूरा, लेकिन 450 वर्ग मीटर निजी जमीन के अधिग्रहण में दो माह की देरी। भदवासिया आरओबी के लिए 4 करोड़ बकाया।
2. आय बढ़ाने व लैंड बैंक की प्रगति| हाउसिंग बोर्ड को चोखा व कृषि मंडी के लिए आंगणवा में जमीन बेचने का मामला जयपुर में अटका। लैंड बैंक कागजों में, अफसर ही नियुक्त नहीं।
3. मास्टर प्लान की स्थिति| जोधपुर का नया मास्टर डवलपमेंट प्लान एक साल से अटका। अभी ढाई सौ से ज्यादा आपत्तियों पर सुनवाई होनी है। प्लानिंग शाखा के अफसर बदले।
4. तकनीकी, विधिक व इंजीनियरिंग शाखा में कार्मिक- सौ पद खाली। पटवारी के 18, लेखाकार के 12 और जेईएन-एईएन के 30 से ज्यादा पद नहीं भरे। भूखंडों की नीलामी में देरी।

5. राज्य सरकार के स्तर पर पेंडिंग मामले| बड़े भूखंडों की करीब सौ पत्रावलियां अटकी। हाउसिंग बोर्ड व मंडी को जमीन देने, मॉनिटरिंग कमेटी के कार्यों के लिए सौ करोड़ देने जैसे कई अहम मामले अटके।
फोटो- अफसरों की बैठक लेते शर्मा (बाएं)।