जोधपुर. हाईकोर्ट ने कहा है कि महिलाएं कौनसा काम कर सकती हैं और कौनसा नहीं, यह तय करना सरकार का अधिकार नहीं है। न्यायाधीश संगीत लोढ़ा ने महिला अभ्यर्थी को बीटेक माइनिंग में प्रवेश नहीं देने के मामले में सोमवार को सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सरकार अपनी गलती मानते हुए या तो अभ्यर्थी को प्रवेश दे या फिर अपने प्रावधान को सही साबित करे। इसके बाद दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद इस मामले में निर्णय कर लिया जाएगा। अगली सुनवाई 26 सितंबर को होगी।
उदयपुर निवासी छात्रा सुंदरा सोढ़ा ने उसे बीटेक माइनिंग में प्रवेश नहीं दिए जाने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। सोमवार को सुनवाई के दौरान जस्टिस लोढ़ा ने कहा कि महिलाएं अमुक काम नहीं कर सकती हैं, यह बेतुकी बात है। वह जमाना चला गया है, मैकेनिज्म के दौर में क्या काम नहीं किया जा सकता है? एक भी ऐसा फील्ड नहीं है, जहां महिलाएं नहीं हैं। फिर भी सरकार यह साबित करना चाहती है तो वह करे।
आरपीईटी आयोजकों से मांगा स्पष्टीकरण
न्यायाधीश संगीत लोढ़ा ने बीटेक की सीटों और उन पर महिलाओं को दिए गए आरक्षण के संबंध में भी आरपीईटी आयोजकों से स्पष्टीकरण मांगा है। अगली सुनवाई पर आरपीईटी आयोजकों व तकनीकी शिक्षा विभाग को अपना पक्ष स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता पीआर सिंह ने पैरवी की।