जोधपुर. हाईकोर्ट ने महिला अभ्यर्थियों को माइनिंग इंजीनियरिंग में प्रवेश नहीं देने के प्रावधान पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि जब लड़कियां चांद पर जा रही हैं और मैरीकॉम का जमाना है, तब इस तरह महिलाओं को अध्ययन से रोकना अतार्
किक और अमान्य के साथ-साथ शर्मनाक है। उन्होंने आरपीईटी के को-ऑर्डिनेटर को संबंधित अभ्यर्थी की मैरिट में स्थिति व प्रवेश की संभावना के बारे में स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।
सुनंदा सोढ़ा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उसका आरपीईटी के तहत उदयपुर स्थित कॉलेज ऑफ टेक्निकल एंड इंजीनियरिंग में दाखिल हुआ। सुनंदा ने माइनिंग इंजीनियरिंग का ऑप्शन दिया, लेकिन कॉलेज ने 20 सीटें होने के बावजूद उसे प्रवेश नहीं दिया।
अंडरग्राउंड माइनिंग जॉब में गर्ल्स नहीं
कॉलेज का तर्क
कॉलेज की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने बताया कि माइंस एक्ट के अनुसार अंडरग्राउंड में माइनिंग आदि कार्य के लिए महिलाओं को नियोजित नहीं किया जा सकता है। इसी आधार पर संबंधित महिला अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया गया।
जॉब बाद की बात, पहले पढ़ाई तो करने दो
छात्रा का सवाल
जवाब देते हुए याचिकाकर्ता सुनंदा सोढ़ा के अधिवक्ता विकास बालिया ने कहा कि जॉब का मुद्दा तो बाद की बात है। किसी छात्रा को माइनिंग की पढ़ाई से रोकना गलत है।
भास्कर पड़ताल
एक्ट 62 साल पुराना, जाॅब अब भी नहीं मिल रहे, कॉलेजों ने पढ़ाई से भी वंचित किया
इंडियन माइंस एक्ट 1952 में बनाया गया था। यह महिलाओं को माइंस में अंडरग्राउंड कार्य करने से रोकता था। 62 वर्ष बाद महिलाअों की दुनिया बदल चुकी है तब भी इस एक्ट के नाम पर उन्हें इस ब्रांच की पढ़ाई तक से रोक रहे हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि इन 62 वर्षों में एक्ट में कोई संशोधन तक नहीं किया गया।
नौकरियाें में कोटा भी पर बिना इंजीनियरिंग कैसे मिलेंगी
माइनिंग में अंडरग्राउंड माइनिंग के अलावा भी कई जॉब हैं। असिस्टेंट माइनिंग इंजीनियरिंग की भर्तियों में लड़कियों के लिए सीटें आरक्षित भी थीं। सवाल यह है कि बिना माइनिंग इंजीनियरिंग किए लड़कियों को ये पोस्ट मिलेंगी कैसे।
प्रैक्टिकल का बहाना बताकर पढ़ाई से भी रोकते हैं
तर्क दिया जाता है कि प्रैक्टिकल के लिए भी माइंस में जाना होता है। छात्राओं का कहना हैं, माइनिंग एक्ट प्रैक्टिकल के लिए ऐसा करने से तो मना नहीं करता।
हजारों मीटर गहराई में काम कर रही हैं : लोढ़ा
न्यायाधीश संगीत लोढ़ा ने भी महिला अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं देने पर कहा कि महिलाएं तो पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के तहत हजार-दो हजार मीटर की गहराई तक जाकर कार्य कर रही हैं। हर क्षेत्र में महिलाएं समानता पर हैं तो माइनिंग के कोर्स में यह असमानता क्यों है? जब सरकार ही महिला सशक्तीकरण के दौर में इस तरह की बात करेगी तो शर्म की बात है।