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हाईकोर्ट के अल्टीमेटम के बाद पशुपालकों मे मची खलबली, 30 जनवरी लास्ट डेट

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. शहर में बसे पशुपालकों और डेयरियों को शहर से दूर शिफ्ट करने की कवायद तेजी से चल रही है। बड़ली में स्थान चिह्नित भी है, लेकिन पशुपालक इसके लिए तैयार नहीं है। उधर, राजस्थान हाईकोर्ट पिछले दिनों जेडीए और नगर निगम को अब तक डेयरियों को शहर से दूर शिफ्ट नहीं करने पर फटकार लगा चुका है।

साथ ही निर्देश दे चुका है कि वे 30 जनवरी तक पसंदीदा स्थल की सूची कोर्ट में पेश करें। इस निर्देश के बाद पशुपालकों में खलबली मची हुई है। ज्यादातर पशुपालकों का कहना है कि निगम और जेडीए उन्हें शहर से कई किलोमीटर दूर बड़ली की पथरीली भूमि में शिफ्ट करना चाहता है, वहां आधारभूत सुविधाएं नहीं है। ऐसे में वे अपनी काम कैसे करेंगे, यहां कई समस्याएं पेश आएगी।

उल्लेखनीय है कि छह साल पहले तत्कालीन यूआईटी (अब जेडीए) ने हाईकोर्ट के आदेश पर ही पशुपालकों के लिए बड़ली में खसरा संख्या 88 की 25 बीघा जमीन चिह्नित की थी, लेकिन पशु डेयरियों के संचालकों ने इस जमीन को पथरीली बताकर खारिज कर दिया था। पशुपालक इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए तो कोर्ट ने तत्कालीन राहत देते हुए प्रशासन से कहा था कि उक्त जमीन को पहले विकसित करें।

पथरीली और अविकसित जमीन पर नहीं बसना चाहते पशुपालक
क्या है मामला

डीबी सिविल रिट 4409/94 में हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे कि शहर को आवारा पशुओं से मुक्त किया जाए। इसके लिए नियमित तौर पर अभियान चलाए। एक अन्य जनहित याचिका 6073/93 में हाईकोर्ट ने मुख्य रास्तों से आवारा पशुओं को हटाने को कहा था।


कहां अटका ?
निगम ने आदेशों की पालना में तीन काऊकेचर खरीदे व पशुओं की धरपकड़ भी की, लेकिन गोपालक इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चले गए। पशु डेयरियों के लिए गो-पालकों को बड़ली में जमीन भी दी, लेकिन यहां शिफ्ट होने से इनकार कर दिया। बाद में झालामंड व गुड़ा के निकट जमीन तय की, लेकिन यहां भी मूलभूत सुविधाएं विकसित नहीं हो पाने से गो-पालक यहां पशु डेयरियां शिफ्ट नहीं कर पा रहे हैं।

प्रशासन की ढील हर बार बनी अड़चन
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था 'गवर्नमेंट इज बेस्ट जज'। जेडीए व निगम ने पशु डेयरियों को शहर के बाहर शिफ्ट करने की कवायद की, लेकिन मामला नहीं सुलझा। प्रशासन की ढीले के चलते शत प्रतिशत टैग नहीं लग पाने से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।


शहर की अन्य दिशाओं में कॉलोनी बसाने की मांग
पशुपालकों का कहना है कि गोपालक समाज द्वारा उपलब्ध करवाई भूमि का कम दरों में नियमन करे तो वह पशु डेयरियों को शहर के बाहर शिफ्ट करने को तैयार है। गोपालक समाज तय समय सीमा में सूची पेश कर देगा। गोपालक सरकार से यह मांग कर चुके है कि वह बड़ली के अलावा शहर की अन्य दिशाओं में मिल्कमैन कॉलोनी बसाए ताकि बार-बार शिफ्ट करने की नौबत न आए।
पशुपालकों की स्वयं के स्तर पर उपलब्ध करवाई भूमि का नियमन कर विकास करवाए।
ब्याज रहित लोन और सब्सिडी पूर्ण धनराशि पर उपलब्ध करवाए ताकि बाड़ों का निर्माण हो सकें।
पशुपालकों का नए सिरे से सर्वे कर उन्हें मौजूदा पशुधन के अनुरूप भूखंड आबंटित करे।
भूखंड टोकन राशि पर आवंटित किए जाए।


बड़ली में छोटे-छोटे प्लॉट कैसे रखेंगे पशुओं को
गौ पालकों के लिए बड़ली में छोटे प्लाट है। यहां सुविधाएं भी नहीं है। झालामंड, बासनी सिलावट व बोरानाडा में भूमि उपलब्ध है।यहां रियायती दर पर पट्टे मिले तो लोग बस जाएंगे।
आनंद भाटी ठाकर, अध्यक्ष घांची महासभा


गौ पालकों के लिए सरकार बड़ली में पूरी सुविधाएं उपलब्ध कराएं। बिना सुविधाएं शिफ्ट करना मुश्किल है। लोगों को दिक्कतें आएंगी।
जुगल भाटी, पूर्व अध्यक्ष घांची महासभा

पशुपालकों ने स्वयं झालामंड में जमीन खरीदी है। वहां सुविधा देने के साथ पट्टे रियायती दर पर दें। बड़ली में भी सुविधा को लेकर विवाद है। सरकार इस ओर को ध्यान देना चाहिए।
पूनमचंद पंवार, पूर्व महासचिव, घांची महासभा