जोधपुर। 26 जनवरी एक ऐसा दिन है जब प्रत्येक भारतीय के मन में देश भक्ति की लहर और मातृभूमि के प्रति अपार स्नेह भर उठता है। यह दिन हमें देश के सभी शहीदों के निस्वार्थ बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने आजादी के संघर्ष में अपने जीवन की बलि दे दी। 26 जनवरी के इस पावन अवसर पर dainikbhaskar.com एक ऐसे वीर योद्धा के बारे में जिनके खून में देशभक्ति थी। जिनके नेतृत्व में सेना ने चीन सैनिकों के एक बड़े जथे को मौत के घाट उतार दिया था।
देशभक्ति उनके खून में थी। जोधपुर के इस परमवीर के पिता लेफ्टनेंट कर्नल थे। बेटा भी बड़ा होकर सेना में मेजर बना। जोधपुर के मेजर शैतान सिंह कुमाऊं रेजिमेंट में भर्ती हुए। बात 1962 की है जब चीन ने भारत पर हमला कर दिया।
13वीं कुमाऊं रेजिमेंट की सी कंपनी को मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में चुशूल के पास रजांगला दर्रे में चीनी सैनिकों का सामना करने के लिए भेजा गया। इस दर्दे की ऊंचाई 17,000 फुट से अधिक है। इतनी ऊंचाई पर नवंबर की सर्दी में किसी इंसान के लिए खड़े होना भी तकलीफ का सबब होता है। वहां युद्ध की बात सोच कर भी हड्डियां कड़कड़ा जाएं।
इसके बाद भी हमारे सैनिकों ने जमकर मुकाबला किया और मेजर शैतान सिंह ने पूरी बहादुरी से अपने सैनिकों का नेतृत्व किया। 18 नवंबर को 1962 को सुबह 4:35 बजे चीनी सैनिकों ने अचानक हमला बोल दिया। इस जंग में भारत के केवल 114 जवानों ने चीन के लगभग 2000 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था।
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