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जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय को पूरे किये 50 साल

9 वर्ष पहले
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जोधपुर.जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय शनिवार को अपनी स्वर्ण जयंती मनाएगा। जोधपुर विश्वविद्यालय के नाम से इसकी शुरुआत 14 जुलाई 1962 को हुई थी। तब केवल जसवंत हॉल, एसएमके परिसर व केएन कॉलेज ही थे। पहले कुलसचिव (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) आरएस कपूर ने सरकार से 700 बीघा जमीन दिलवा कर क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रदेश के नंबर एक विवि के विकास के रास्ते खोले। शुरुआती दौर से लेकर अब तक विवि में कई उतार चढ़ाव देखने को मिले। विवि ने देश विदेश में अपनी खास पहचान बनाई, साथ ही कई विवाद भी जुड़े। जेएनवीयू अब तक प्रदेश का एक मात्र आवासीय विश्वविद्यालय था, हाल में राज्य सरकार ने इसे संभागीय विवि का दर्जा दिया है। तेजी से बदलते दौर में विश्वविद्यालय के सामने कई चुनौतियां भी हैं। स्थापना से लेकर अब तक के सफर पर भास्कर की विशेष रिपोर्ट- स्वर्ण जयंती वर्ष के कार्यक्रम आज से जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम शनिवार से से शुरू होंगे। पहले दिन न्यू कैंपस के मुख्यद्वार पर स्थापित शेरे राजस्थान जयनारायण व्यास की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी। इसके बाद दीक्षांत समारोह मैदान में स्वतंत्रता सेनानियों और पूर्व कुलपतियों का सम्मान किया जाएगा। कुलपति प्रो. बीएस राजपुरोहित ने बताया कि22ू कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानी विश्वविद्यालय परिवार को आशीर्वचन भी प्रदान करेंगे। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी मौजूद रहेंगे। जोधपुर विश्वविद्यालय की उपलब्धियां एमबीएम इंजी. कॉलेज की खास पहचान : जेएनवीयू के एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज ने देश विदेश में अपनी खास पहचान बनाई है। यहां के पास आउट स्टूडेंट्स ने देश विदेश में खूब नाम कमाया। इस कॉलेज की स्थापना आईआईटी खडग़पुर से भी पहले हुई। इसकी साख की वजह से आईआईटी की अस्थाई कक्षाएं एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज में लगाने का मौका मिला तथा जोधपुर में आईआईटी की स्थापना का यह भी एक आधार रहा। विधि संकाय ने देश को दिए कई जज : जेएनवीयू के विधि संकाय ने विधि के क्षेत्र में अपनी खास पहचान दी। हाल ही में जस्टिस दलवीर भंडारी को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में न्यायाधीश बनाया गया है। वे भी विधि संकाय के छात्र रह चुके है। इसके अलावा जेएनवीयू के विधि संकाय करीब 15 हाईकोर्ट जज व 5 से ज्यादा सुप्रीम कोर्ट के जज दे चुका है। अधीनस्थ न्यायालयों में भी जेएनवीयू के कई स्टूडेंट्स ने न्यायाधीश बन विधि संकाय का परचम फैलाया है। प्रदेश का पहला ऑनलाइन विश्वविद्यालय : जेएनवीयू हाल ही में प्रदेश का पहला ऑनलाइन विश्वविद्यालय बन गया। जेएनवीयू के पूर्व कुलपति प्रो. नवीन माथुर ने इस कार्य की शुरुआत की थी तथा मौजूदा कुलपति प्रो. बीएस राजपुरोहित ने इसे मूर्त रूप दिया। इस कार्य की कमान प्रो. चैनाराम चौधरी को सौंपी गई है। अब विश्वविद्यालय में प्रवेश, परीक्षा कार्य तथा परिणाम की तमाम सुविधाएं ऑन लाइन कर दी गई है। जोधपुर सीए का गढ़ : जोधपुर को चार्टर्ड एकाउंटेंट की मंडी कहा जाता है। जोधपुर के वाणिज्य एवं प्रबंध संकाय ने सीए के क्षेत्र में अपनी खास पहचान बनाई है। इस संकाय से ग्रेजुएशन करने वाले कई छात्रों ने सीए कर देश विदेश में अपना परचम लहराया है। वाणिज्य संकाय में एमबीए के कोर्स की शुरुआत भी काफी वर्षो पहले हुई थी। जेएनवीयू में कुलपति रहे प्रो. नवीन माथुर एमबीए के पहले बैच के स्टूडेंट्स रहे, जब एमबीए की जोधपुर में केवल 30 सीटें थीं। जेएनवीयू की चुनौतियां वित्तीय संकट से उभरना : जेएनवीयू पिछले लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है। जेएनवीयू को वर्तमान में सालाना 50 करोड़ रुपए की ग्रांट मिलती है। यह ग्रांट गत वर्ष बढ़ाई गई थी। गत वर्ष तक तो जेएनवीयू की सालाना ग्रांट मात्र 28 करोड़ रुपए थी। जेएनवीयू के पास सेवानिवृत शिक्षकों व कर्मचारियों को पेंशन देने के लिए फंड नहीं है, इसका खर्च राज्य सरकार द्वारा वहन करने की भी मांग चल रही है। नियमित कक्षाएं व सुविधाएं : जेएनवीयू में नियमित कक्षाएं लगाना भी बड़ी चुनौती है। विश्वविद्यालय के पास कक्षाएं लगाने के लिए कक्षों की भी कमी है। लेकिन नए कक्ष का निर्माण करने तथा रिपेयरिंग मद में आने वाला फंड ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। विश्वविद्यालय के हॉस्टल भी दुर्दशा की स्थिति में है। लेकिन इन्हें ठीक करवाने के लिए फंड नहीं है। वहीं जेएनवीयू के स्टूडेंट्स के लिए आधारभूत सुविधाएं भी कम है। रिसर्च का स्टैंडर्ड : जेएनवीयू में अब शोध कार्यो की कमी आ गई है। जेएनवीयू के अधिकांश शिक्षक सेवानिवृत हो चुके है तथा खाली पदों पर नियुक्तियां हो नहीं रही है, इस वजह से रिसर्च का कार्य कम होने लगा है। विश्वविद्यालय को कक्षाओं में भी 60 फीसदी से ज्यादा कार्य अंशकालीन शिक्षकों से करवाना पड़ रहा है। कई विभाग तो ऐसे है, जिसमें शिक्षकों की संख्या केवल 20 फीसदी रह गई है। संभागीय विश्वविद्यालय का संचालन : जेएनवीयू को हाल ही में संभागीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिया गया है। विश्वविद्यालय के पास मौजूदा स्थिति में स्टॉफ की कमी है। अशैक्षणिक पदों में आधे से ज्यादा पद खाली पड़े है। विश्वविद्यालय के संभागीय विश्वविद्यालय बनने के बाद गोपनीय व परीक्षा शाखा कार्य दुगने से ज्यादा बढ़ जाएगा। ऐसे में कार्य करना काफी मुश्किल होगा, क्योंकि इन विभागों में अस्थाई कर्मचारियों से सहायता नहीं ले सकते। विश्वविद्यालय ने देश-विदेश में पहचान बनाई, लेकिन भविष्य में चुनौतियां भी कम नहीं जेएनवीयू से जुड़े कुछ रोचक तथ्य स्थापना 14 जुलाई 1962 शुरुआती नाम जोधपुर विश्वविद्यालय जेएनवीयू कब से 1991 कुल एरिया 764.75 एकड़ निर्माण क्षेत्र 1,52,288 स्क्वायर मीटर कुल संकाय 5 कुल कोर्स 92 अब तक कुलपति बने 37 (कार्यवाहक सहित) अब तक छात्रसंघ अध्यक्ष 15 (वर्ष 1989 से अब तक) पहले कुलपति प्रो. बीएन झा पहले कुलसचिव आरएस कपूर पहले शिक्षक प्रो. एलएस राठौड़ पहले छात्रसंघ अध्यक्ष केएम भंडारी एक्सपर्ट व्यू: तब कक्षाओं में आते थे स्टूडेंट्स प्रो. एलएस राठौड़ पूर्व कुलपति जेएनवीयू व प्रथम शिक्षक जोधपुर विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय की स्थापना का पहला दिन आज भी मुझे याद है। कक्षा में गया तो सभी स्टूडेंट्स खड़े हो गए। वह खुशी मैं कभी नहीं भूल सकता। शिक्षक के रूप में विश्वविद्यालय में मेरा पहला दिन था। केंद्रीय कार्यालय साथिन हाउस में हुआ करता था तथा पहले कुलपति प्रो. बीएन झा थे। विश्वविद्यालय की स्थापना के अवसर पर डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन आए थे तथा ओल्ड कैंपस में बहुत बड़ा आयोजन हुआ था। उन दिनों में कक्षाएं स्टूडेंट्स से अटी हुई रहती थीं तथा कक्षा में फर्नीचर कम होने के कारण बच्चे पीछे खड़े रहते थे, लेकिन आज स्थितियां बिल्कुल बदल गई हैं। उस वक्त 200 रुपए तनख्वाह थी, लेकिन हर शिक्षक में पढ़ाने का जुनून था पहले कुलपति प्रो. झा ने विश्वविद्यालय के लिए जमीन लेने के लिए जब ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी आरएस कपूर को भेजा तो उन्होंने 23 बीघा जमीन की मांग रखी, लेकिन जब 700 बीघा जमीन मिली तो किसी को विश्वास नहीं हुआ। 1969 में न्यू कैंपस में साइंस ब्लॉक बना।

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