जोधपुर. दिल्ली के आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल के आईसीयू से पूरे 45 दिन बाद उम्मीद जगाने वाली खबर आई है। यहां भर्ती हैं पूर्व वित्त व रक्षा मंत्री जसवंत सिंह। उनकी आंखों की हिलती पुतलियों ने संकेत दिए हैं कि वे जिंदगी की सबसे बड़ी जंग भी आसानी से नहीं हारेंगे। इधर, दो आंखें आईसीयू की कांच की दीवार से टकटकी लगाए पूरी उम्मीद से निहारती रहती हैं। बिना पलक झपकाए। ये आंखें जसवंत की पत्नी शीतल कंवर की हैं। वे हादसे के बाद से ही ठीक से सो नहीं पाई हैं। कड़े अनुशासन वाले आर्मी हॉस्पिटल में वे दिन में दो-तीन बार पति को देखने के लिए आईसीयू के भीतर जाती हैं।
जसवंत की दो और आंखें, उनके दोनों बेटे मानवेंद्र सिंह और भूपेंद्र सिंह। 12-12 घंटे आईसीयू के बाहर बैठे रहते हैं। जब हॉस्पिटल के विशेषज्ञ डॉक्टर उनका रुटीन चेकअप करके बाहर आते हैं, तो पूरे परिवार की आंखें इस उम्मीद में उन पर टिक जाती हैं कि शायद वे अच्छी खबर लाए हों। पिछले डेढ़ माह से रोज यही दृश्य नजर आ रहा है। घर में फिसलकर गिरने के बाद 8 अगस्त को जसवंत सिंह को आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उन्हें तीसरी मंजिल पर बने आईसीयू के वीवीआईपी कॉटेज नंबर एक में रखा गया है। तभी से कोमा में हैं। वे अब भी वेंटीलेटर सपोर्ट पर हैं।
बीते डेढ़ माह से हॉस्पिटल में अपने पति मानवेंद्र सिंह को संबल दे रहीं चित्रा सिंह कहती हैं- मैं कई वर्ष बाद राखी पर पीहर गई थी। वहां पहुंचते ही दाता (पिताजी) के सिर में चोट लगने की खबर मिली तो तत्काल वापस दिल्ली पहुंची। अब दाता की तबीयत में कुछ सुधार है। पहले तो उनके शरीर में मूवमेंट नहीं था लेकिन दो-तीन दिन पहले उनकी आंखों की पुतलियां हिलने लगी हैं। डॉक्टरों ने बताया है कि उनका ब्लड प्रेशर व हार्टबीट नॉर्मल है। यह परिवार ही नहीं, मारवाड़वासियों की दुआओं का भी असर है कि वे रेस्पोंड करने लगे हैं। हमें उम्मीद है कि वे जल्द ही कोमा से बाहर आ जाएंगे।
आर्मी आरआर हॉस्पिटल नई दिल्ली से डीडी वैष्णव की रिपोर्ट