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जोधपुर जैसे शहर में अफसरों के पद खाली रहना सरकार की कमजोरी : कटारिया

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज्य मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि जोधपुर जैसे शहर के सरकारी विभागों में अफसरों के पद खाली रहना सरकार की कमजोरी रही है, लेकिन इस पर जल्द ध्यान देकर अफसरों की पोस्टिंग की जाएगी। ताकि लोगों को सरकारी योजनाओं का समय पर लाभ मिले। वे शनिवार को जोधपुर प्रवास के दौरान पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे।
कटारिया ने कहा कि पंचायतराज संस्थाओं में 15 हजार करोड़ का बजट हैं। योजनाएं भी पर्याप्त हैं, जरूरत राशि को सही तरीके से खर्च करने और पूरी मॉनिटरिंग रखने की है। उन्होंने बताया कि नरेगा में काम के तरीके को बदलने के लिए सरकार ने तय किया है कि गांवों में तालाब सही ढंग व आकार में बने। प्रदेश में हुए उप चुनाव में पार्टी की हार पर उनका कहना था कि जनता को सरकार से अपेक्षाएं ज्यादा है, जैसा अभी कम समय में हम नहीं कर पाए। नतीजे हमारे लिए प्रसन्नता जैसे नहीं है, लेकिन इस पर मंथन किया जाएगा।
भास्कर पड़ताल
जिले के प्रभारी मंत्री की विवशता के पीछे की कहानी
6 महीने से रुके हैं 6 विभागों में काम, क्योंकि 19 अफसरों के पद ही खाली
जोधपुर पहुंचे जिले के प्रभारी मंत्री और ग्रामीण एवं पंचायत राज मंत्री गुलाबचंद कटारिया को शनिवार को स्वीकारना पड़ा कि शहर में अफसरों के खाली पद नहीं भर पाना सरकार की कमजोरी है। भास्कर ने मंत्री की इस विवशता के पीछे की कहानी पता की तो पता चला कि नगर निगम व जेडीए में छह-छह अफसर तो जिला प्रशासन में 1, डीआईजी स्टांप का 1, पुलिस में 4 व जिला परिषद में एक अधिकारी का पद रिक्त चल रहा है।
निगम में सिर्फ डाक ही हो रही मार्क
नगर निगम में आयुक्त के पांच पद हैं। पांचों पद चार माह से रिक्त पड़े हैं। इसके पहले भी लंबे समय से दो पद ही भरे रहे।
असर
सिर्फ डाक ही मार्क हो रही है। बाकी सभी पत्रावलियों का मूवमेंट रुका हुआ है। अफसरों की कमी के कारण मार्च 2014 तक निर्धारित लक्ष्य से 39.95 आय ही हो सकी थी।
निगम सचिव
यह पद 2008 से खाली पड़ा है। बोर्ड बैठक बुलाने के अलावा पशुबाड़े के प्रभारी अधिकारी का पद भी होता है निगम सचिव के पास।
असर
बैठक बुलाना व मिनट्स तैयार करवाने में परेशानी होती है। पशुबाड़े प्रभारी अधिकारी नहीं होने का नतीजा है कि हर दिन 10 से 12 पशु दम तोड़ रहे हैं।
स्वास्थ्य अधिकारी
वर्ष 2007 से हैल्थ अफसर का पद खाली पड़ा है। इसके बाद मुख्य सफाई निरीक्षकों ने ही संभाला। किसी ने आज तक ध्यान नहीं दिया।
असर
समूची मॉनिटरिंग हैल्थ अफसर ही करते हैं, लेकिन पिछले सात साल से यह काम मुख्य सफाई निरीक्षक के पास होने से सफाई व्यवस्था लगातार चरमरा रही है।
जेडीए
उत्तर, दक्षिण, पूर्व व पश्चिम जोन उपायुक्त के अलावा तीन व उपायुक्तों के पद हैं, पर वर्तमान में सिर्फ उपायुक्त दक्षिण का पद भरा हैं। मुख्य नियंत्रक का पद भी खाली है।
असर
जमीनों से संबंधित काम अतिक्रमण की शिकायतों का निस्तारण, आय जुटाने के काम प्रभावित हो रहे हैं। आमजन के काम रुकने के साथ राजस्व भी प्रभावित हो रहा है।
जिला प्रशासन
कलेक्टर ट्रेनिंग पर है। एडीएम (प्रथम) को काम देखना पड़ रहा है। ऐसे में दो पदों पर व्यवस्थाएं प्रभावित होती है।
असर
कलेक्टर के ट्रेनिंग पर जाने से जन सुनवाई करने के साथ समूचे काम का जिम्मा एडीएम (प्रथम) अरुण कुमार हसीजा संभाल रहे हैं, लेकिन काफी मशक्कत करनी पड़ती है। बैठकों के व्यस्त होने से सुनवाई प्रभावित होती है।
डीआईजी स्टांप, जिला परिषद
डीआईजी स्टांप का पद खाली होने से रजिस्ट्री कार्य की मॉनिटरिंग प्रभावित हो रही है। इसके अलावा जिला परिषद में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एसीईआे) का पद लंबे समय से खाली पड़ा है। इससे विकास के कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
पुलिस
पुलिस कमिश्नरेट में एसीपी के चार पद खाली हैं। इनमें एसीपी हैड क्वार्टर, एसीपी कंट्रोल रूम, एसीपी प्रोटोकॉल और एसीपी प्रतापनगर के पद शामिल हैं। अतिरिक्त कार्यभार से कार्य चलाया जा रहा है। नियमित कार्य प्रभावित हो रहे हैं।