जोधपुर में पोलो सेशन के दौरान खेले जा रहे मैच की एक तस्वीर...
जोधपुर। कहने को तो पोलो बहुत पुराना खेल है, लेकिन देश के चुनिंदा स्थानों पर ही इसे खेला जाता है। इस खेल के नियम बहुत ही रोचक और इसके मैदान व इस खेल में इस्तेमाल की जाने वाली स्टिक और गेंद भी खास किस्म की होती हैं।
इन दिनों जोधपुर शहर में पोलो खेल का रोमांच अपने चरम पर है। उल्लेखीनय है कि इन दिनों जोधपुर में पोलो सेशन चल रहा है। यह 1 (31 दिसम्बर) महीने तक चलेगा। इसलिए DainikBhaskar.com आपको इस खेल से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियों से रूबरू करा रहा है।
इस खेल में लेफ्ट हैंड खिलाड़ियों के लिए कोई जगह नहीं...
पोलो के खेल में लेफ्ट हैंड खिलाड़ियों के लिए कोई स्थान नहीं है। वर्ष 1930 तक पोलो में लेफ्ट हैंड खिलाड़ियों के खेलने पर पूरी तरह से प्रतिबंध था। दूसरे विश्व युद्द के बाद इस प्रतिबंध को हटा लिया गया। इसके बाद विश्व में पोलो के नियम बनाने वाली संस्था यूएस पोलो एसोसिएशन ने वर्ष 1974 में एक बार फिर से लेफ्ट हैंड खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके पीछे तर्क दिया गया कि लेफ्ट व राइट हैंड के खिलाड़ी जब आमने-सामने होते हैं तो इनके बीच टक्कर लगने की आशंका सबसे अधिक रहती है। खिलाड़ियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह प्रतिबंध लगाया गया है।
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