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लाइसेंस की उम्र नहीं, जनजाति की छात्राओं को बांट रहे स्कूटी

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. राज्य सरकार ने पिछले 9 साल में हजारों नाबालिग बालिकाओं को दुपहिया वाहन तो बांट दिए, लेकिन परिवहन विभाग के नियमों के चलते इनमें से अधिकांश को तीन-चार साल बाद लाइसेंस मिल पाता है। दरअसल, राज्य में ड्राइविंग लाइसेंस मिलने की उम्र तो 16 साल है, लेकिन सरकार 12-13 साल की आदिवासी बालिकाओं को स्कूटी का तोहफा दे रही है।
प्रदेश में वर्ष 2005-06 में 10वीं और 12वीं कक्षा में 65 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाली आदिवासी बालिकाओं को नि:शुल्क स्कूटी देने की योजना शुरू की गई थी। शिक्षा विभाग के प्रस्तावों पर जनजाति विकास विभाग की ओर से ये स्कूटियां बांटी जाती हैं।
235 बालिकाओं को दी जानी हैं स्कूटी
शिक्षा विभाग की ओर से इस बार 10वीं की 178 और 12वीं की 220 बालिकाओं को स्कूटी देने के लिए प्रस्ताव भिजवाए गए हैं, जिनमें से 235 बालिकाओं की स्कूटी के लिए स्वीकृति जारी कर दी गई है।
ये हैं नियम
मोटर व्हीकल्स एक्ट के अनुसार 16 वर्ष की आयु से पहले किसी भी व्यक्ति को वाहन चलाने के लिए लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता, जबकि जनजाति विकास विभाग के अधिकारी आंख मूंदकर स्कूटी बांट रहे हैं। ड्राइविंग लाइसेंस का ऑनलाइन सिस्टम होने के बाद यह व्यवस्था और भी पुख्ता हो गई है क्योंकि इसका सॉफ्टवेयर तब तक आवेदन स्वीकार नहीं करता जब तक की उम्र 16 साल पूरी न हो जाए। परिवहन आयुक्त राजेश्वरिसंह ने बताया कि लाइसेंस बनाने की उम्र तो 16 साल है, लेकिन वे स्कूटी वितरण पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे कि ऐसा क्यों किया जा रहा है।
केस 1
बांसवाड़ा जिले की 13 साल की उर्वशी सरकारी स्कूटी की मालिक है। जनजाति विकास विभाग की ओर से उर्वशी को यह स्कूटी दी गई है। इसका इंजन नंबर 2291621 तथा चैचिस नंबर 23626 है। परिवहन विभाग की ओर से स्कूटी का रजिस्ट्रेशन नंबर आरजे 03-एसपी-3301 जारी किया गया है लेकिन उर्वशी को यह स्कूटी चलाने के लिए लाइसेंस के लिए अभी तीन साल इंतजार करना पड़ेगा।
केस 2

बांसवाड़ा की विधि जोशी की उम्र 14 साल है। परिवहन विभाग की ओर से विधि को दो साल बाद ही ड्राइविंग लाइसेंस मिलेगा लेकिन राज्य सरकार ने उसे इसी उम्र में स्कूटी दे दी है। टीएडी की ओर से विधि को आरजे-03-एसपी 3229 रजिस्ट्रेशन नंबर की स्कूटी दी गई है जिसका इंजन नंबर 2291700 है।
जनजाति विकास विभाग छिपा रहा उम्र
जनजाति विकास विभाग ने 10वीं और 12वीं में 65 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं के आवेदन मांगे हैं। इनमें कहीं भी जन्म तिथि लिखने का कॉलम नहीं है। इसमें छात्रा का नाम, परीक्षा में प्राप्तांक को ही आधार बनाया गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें तो केवल नाम और प्रतिशत की सूचना तैयार करने के निर्देश मिले हैं।

बड़ा सवाल : हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन
स्कूटी चलाते वक्त यदि कोई दुर्घटना हुई तो उसके लिए जिम्मेदार कौन होगा ? क्योंकि स्कूटी चलाने वाली बालिका के पास तो ड्राइविंग लाइसेंस ही नहीं है। किसी लाइसेंसशुदा व्यक्ति के स्कूटी चलाते वक्त भी हादसा हुआ तो उसमें कई कानूनी पेंच सामने आएंगे, क्योंकि अधिकृत रूप से उस स्कूटी की मालिक ये नाबालिग बालिकाएं हैं।
फोटो- बालिकाओं को बांटी गई स्कूटी।