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डाउनलोड करेंजोधपुर. हिरणों को बचाने के दौरान शिकारियों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए शैतानसिंह विश्नोई का गुरुवार को जांबा गांव में अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके दो वर्षीय मासूम पुत्र ने अंतिम विदाई दी। उनके अंतिम दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में पर्यावरणपे्रमी व विश्नोई समाज के लोग उपस्थित थे।
हिरण से बच्चों की तरह प्यार करने वाला ननेऊ गांव का शैतानसिंह विश्नोई मंगलवार को देर रात अपने घर पहुंचा था। इसके कुछ देर बाद क्षेत्र में शिकारियों के आने की भनक लगी तो वह अपने भाई के साथ तत्काल उनका पीछा करने के लिए दौड़ पड़ा। बाद में घरवालों को पता लगा कि शैतान को गोली लग गई है। इससे घर में कोहराम मच गया।
एक तरफ परिजनों को गर्व था कि शैतानसिंह ने हिरणों को बचाने के लिए अपने प्राणों की भी परवाह नहीं की। दूसरी तरफ, उसके मासूम बच्चों की मनोस्थिति देख परिजनों का कलेजा मुंह को आ रहा था। किसी तरह घर के मुखिया अर्जुनराम अपने एक साल के मासूम पोते को संभाल रहे थे, वहीं अन्य ग्रामीण पूरे परिवार को ढांढस बंधा रहे थे।
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