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जम्मू में जान बचाने को 3 साल के बेटी को दूसरी मंजिल से फेंका, फिर खुद कूदे

7 वर्ष पहले
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(फोटो- श्रीनगर घूमने गए आठ लोगों के परिवार ने आठ दिन तक किया जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष।)
जोधपुर. शहर के भीतरी क्षेत्र जूनी मंडी में रहने वाला एक परिवार श्रीनगर में घूमने गया, लेकिन वहां आई बाढ़ में फंस गया। आठ सदस्यों का यह परिवार आठ दिन तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद शनिवार को दिल्ली सुरक्षित पहुंच गया। परिवार के सदस्यों ने अपने परिजनों को फोन कर आपबीती बताई। सचिन जैन ने बताया कि उनके पिता नरेंद्रमल जैन ने फोन पर बताया कि गत 6 सितंबर को होटल के बाहर 6 फीट तक पानी गया था।
10 किलोमीटर तक जंगलों के रास्ते तय किया सफर

वहां से निकलने के लिए परिवार के एक-एक सदस्य को दूसरी मंजिल से पानी में छलांग लगानी पड़ी। इस दौरान 3 और 6 साल की मासूम बच्चियों को भी दूसरी मंजिल से पानी में फेंकना पड़ा। बच्चियों को नीचे खड़े पिता ने पानी में गिरने से पहले पकड़ लिया। इसके बाद वे पानी में करीब 10 किलोमीटर तक पैदल चलकर जंगलों में बने एक आर्मी कैंप में पहुंचे, लेकिन वहां 10 हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ होने के कारण उन्हें राहत सामग्री नहीं मिली। चार दिन तक उन्हें भूखे-प्यासे जंगलों में ही रहना पड़ा। इसके बाद आर्मी ने शनिवार को उन्हें हेलिकॉप्टर से दिल्ली पहुंचाया। वे रविवार को जोधपुर पहुंचेंगे।
15 लोगों ने 2 लीटर पानी पीकर निकाले चार दिन
महामंदिर में आर्य नगर मकान नंबर 39 निवासी राजकुमार सोलंकी (33) पुत्र रतनलाल सोलंकी अपनी पत्नी अनिला (27), पुत्र यशवंत (5) और ध्रुव (3) के साथ गत 5 सितंबर को श्रीनगर घूमने गए थे, लेकिन वहां बाढ़ में फंस गए। होटल में उनके समेत कुल 15 लोग फंसे हुए थे। 15 लोगों ने 4 दिन बिना कुछ खाए केवल 2 लीटर पानी से बूंद-बूंद पीकर निकाले। इसके बाद वहां से गुजर रही नाव वाले को पैसे देकर उन्होंने अपनी जान बचाई और शनिवार को जोधपुर लौटे।
घटना के दिन से सहमे हैं बच्चे
नरेंद्रमल जैन (63) पुत्र जौहरीमल अपनी पत्नी चंद्रकला जैन (58), जंवाई मनीष तातेड़ (35), पुत्री शिल्पा तातेड़ (30), अपनी दो नातिन रियांशी तातेड़ (6), हिमांशी तातेड़ (3), समधी गौतम तातेड़ (59) समधन चंदनबाला (56) के साथ 3 सितंबर को श्रीनगर घूमने गए थे और वहां आई बाढ़ में फंस गए। बच्चे घटना के बाद से अब तक सहमे हुए हैं।
साथी को पीठ पर बैठाकर बचाई जान
झालामंड निवासी मालाराम भी सीमेंट प्लांट की मशीन लेने श्रीनगर गए थे। वहां उन्होंने अपने साथी को पीठ पर बैठाकर पानी में तैरकर जान बचाई। शनिवार को मालाराम ने अपने सुरक्षित होने की घर पर सूचना दी तो उनकी पत्नी को चैन मिला। मालाराम की पत्नी और भाई रविवार सुबह ही ट्रेन आने से तीन घंटे पहले रेलवे स्टेशन पहुंच गए। मालाराम जोधपुर पहुंचे तो जान में जान आई।
चार दिनों तक रहे भूखे-प्यासे
महामंदिर निवासी तातेड़ परिवार चार सितंबर को श्रीनगर घूमने गया था और वहां आई बाढ़ में फंस गया। रविवार को जोधपुर लौटे परिवार के सदस्यों ने बताया कि जंगल में बने आर्मी कैंप में उन्होंने चार दिन तक खाना नहीं खाया और पानी भी नहीं पिया। ऐसा उन्होंने इसलिए किया ताकी शौच करने जंगल न जाना पड़े, वहां सांप और जानवरों के शिकार होने का खतरा था। शहर के भीतरी क्षेत्र में रहने वाले नरेंद्रमल जैन (63) पुत्र जौहरीमल, पत्नी चंद्रकला जैन (58) महामंदिर में रहने वाले अपने जंवाई मनीष तातेड़ (35), पुत्री शिल्पा तातेड़ (30), अपनी दो नातिन रियांशी तातेड़ (6), हिमांशी तातेड़ (3), समधी गौतम तातेड़ (59) और समधन चंदनबाला (56) और साली शांति मेहता (50) के साथ श्रीनगर घूमने गए थे।
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