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मारवाड़ को जोधपुर-जयपुर एक्सप्रेस सहित 6 नई ट्रेनें

9 वर्ष पहले
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जोधपुर.रेल बजट में जोधपुर के हिस्से में कहने को तो छह नई गाड़ियां आ गईं, लेकिन जोधपुर-जयपुर एक्सप्रेस के अलावा सभी साप्ताहिक हैं। एक भी पुरानी ट्रेन के फेरे नहीं बढ़ाए गए।
>जोधपुर-जयपुर एक्सप्रेस (दैनिक) : एक साल से लगी उम्मीद पूरी। जयपुर से सुबह जोधपुर आने वालों को मिलेगी बड़ी सुविधा।
>जोधपुर-कामाख्या (सा.) : गुवाहाटी के लिए एक और ट्रेन। रतनगढ़ रूट से चलेगी। अभी चल रही ट्रेन जयपुर रूट पर।
>जोधपुर-अहमदाबाद (सा.) : वाया समदड़ी-भीलड़ी चलेगी। जोधपुर से अहमदाबाद तक होने से दक्षिण की ट्रेनों पर घटेगा भार।
>जोधपुर-विशाखापट्टनम (सा.): दक्षिण से तो जुड़ाव बढ़ेगा ही, जोधपुर को छत्तीसगढ़ से सीधे जोड़ेगी यह ट्रेन।
>बांद्रा-जैसलमेर (सा.) : बांद्रा के लिए एक और ट्रेन बढ़ेगी। जैसलमेर मुंबई से पहली बार सीधे जुड़ेगा। पर्यटन को फायदा।
>बांद्रा-हिसार (सा.): जोधपुर से हिसार के लिए दूसरी साप्ताहिक एक्सप्रेस ट्रेन। बांद्रा के लिए भी एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।
जोधपुर-अजमेर की दूरी घटेगी
>पुष्कर-मेड़ता नया ट्रैक : यह ट्रैक बनने से जोधपुर-अजमेर के बीच का सफर साढ़े पांच घंटे से घटकर ढाई घंटे का ही रह जाएगा।
>पीपाड़-भोपालगढ़-आसोप- शंखवास-मूंडवा- नागौर : सर्वे में सब कुछ ठीक-ठाक रहता है तो ट्रेनों के लिए एक नया बाइपास तैयार होगा।
>दोहरीकरण : बासनी-सालावास, लूणी बाइपास सहित लूणी हनुवंत और बासनी-भगत की कोठी का दोहरीकरण होगा। ट्रेनों को क्रॉसिंग के लिए रुकना नहीं पड़ेगा।
छह नई ट्रेनें मिली, छह बंद रास्ते नहीं खुले
रेल बजट 2013-14 में मारवाड़ को छह ट्रेनें मिल गईं, लेकिन लंबे समय से चल रही दक्षिण के ट्रेनों की आस फिर अधूरी ही रही। महत्वपूर्ण आधा दर्जन नई लाइनों को हरी झंडी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन यह ख्वाहिश भी पूरी नहीं हुई। एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनों के फेरे बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन किसी भी ट्रेन का फेरा नहीं बढ़ा।
बजट में जयपुर के लिए प्रतिदिन और बांद्रा, अहमदाबाद, विशाखापट्टनम व कामाख्या के लिए नई साप्ताहिक ट्रेन जरूर मिली। मारवाड़ से मावली जंक्शन, मेड़ता में रेल बस और बिलाड़ा-जोधपुर पैसेंजर की तीन अनोखी यात्रा करते हुए आइए जानें, इस रेल बजट में मारवाड़ को क्या मिला और क्या नहीं?
रेल बजट 2013-14 में जोधपुर को छह नई ट्रेनों की सौगात मिली है। हालांकि उम्मीद नई ट्रेनों के साथ पहले से चल रहीं साप्ताहिक व द्वि-साप्ताहिक ट्रेनों के नियमित होने व इनके फेरे बढ़ाने की भी थी, लेकिन यह पूरी नहीं हुई।
रेलमंत्री पवन बंसल ने जोधपुर से अहमदाबाद, विशाखापट्टनम व कामाख्या (असम) के लिए नई ट्रेनों की घोषणा की है। जोधपुर-मुंबई के बीच दो नई ट्रेनें मिली हैं। ये पांचों सप्ताह में एक बार संचालित होंगी। इसके अलावा जोधपुर-जयपुर के बीच नई ट्रेन की घोषणा की गई है, जो रोजाना चलेगी।
नई ट्रेनें और उनके मिलने के मायने
1.जोधपुर से जयपुर (प्रतिदिन, वाया फुलेरा)
जोधपुर से जयपुर के लिए शाम को कोई ऐसी ट्रेन नहीं है जो रात दस बजे तक जयपुर पहुंचा सके। इसी तरह जयपुर से जोधपुर के लिए सुबह कोई ट्रेन नहीं है जो 10 से 11 बजे के बीच जोधपुर पहुंचे। जयपुर से पहली ट्रेन दोपहर में मरुधर एक्सप्रेस ही है। नई ट्रेन प्रतिदिन शाम को चलाए जाने की संभावना है। यही ट्रेन अगले दिन सुबह जयपुर से जोधपुर के बीच चलेगी।
2.जोधपुर से विशाखापट्टनम (साप्ताहिक, वाया रायपुर-टीटलागढ़)
संभवतया वर्तमान में चल रही जोधपुर-पुरी साप्ताहिक एक्सप्रेस के रूट पर ही चलेगी। छत्तीसगढ़ के रायपुर से विशाखापट्टनम जाने वाले मार्ग पर वाया टीटलागढ़ के रास्ते यह ट्रेन डायवर्ट होगी। इससे जोधपुर एक नए मार्ग से जुड़ेगा। संभावना है कि पुरी एक्सप्रेस की तरह यह गाड़ी भी वाया जयपुर दोपहर में ही चलेगी।
3.जोधपुर से कामाख्या (साप्ताहिक, वाया डेगाना-रतनगढ़)
यानी जोधपुर से गुवाहाटी के बीच एक और ट्रेन मिलेगी। रूट डेगाना से रतनगढ़ होते हुए रहेगा। वहां से सराय रोहिल्ला (दिल्ली) होते हुए यह कामाख्या जाएगी। वर्तमान में बाड़मेर से जोधपुर होते हुए चल रही साप्ताहिक गुवाहाटी एक्सप्रेस वाया जयपुर चल रही है।
4.अहमदाबाद से जोधपुर(साप्ताहिक, वाया समदड़ी-भीलड़ी)
जोधपुर से सिर्फ अहमदाबाद तक के लिए कोई ट्रेन नहीं है। न ही ऐसी कोई ट्रेन है जो यहां से रात में चल कर सुबह वहां पहुंचाती हो। इस ट्रेन के शुरू होने से दक्षिण की ओर जाने वाली गाड़ियों से कम से कम एक दिन अहमदाबाद तक के यात्रियों का भार कम होगा। इससे लंबी दूरी के यात्रियों को फायदा मिलेगा।
5.बांद्रा टर्मिनस से जैसलमेर(साप्ताहिक, वाया मारवाड़ जंक्शन-जोधपुर)
इस ट्रेन के शुरू होने से जोधपुर-बांद्रा के बीच एक ट्रेन बढ़ जाएगी। साथ ही महाराष्ट्र व गुजरात के पर्यटकों को जैसलमेर पहुंचने की सीधी सुविधा मिलेगी। जैसलमेर क्षेत्र के लोगों के लिए मुंबई सहित समूचे दक्षिण भारत के लिए यह पहली ट्रेन होगी।
6.बांद्रा टर्मिनस से हिसार
(साप्ताहिक, वाया अहमदाबाद, मारवाड़ जंक्शन, जोधपुर, डेगाना)
इस ट्रेन के शुरू होने से जोधपुर से बांद्रा के लिए एक अतिरिक्त ट्रेन उपलब्ध होगी। साथ ही जोधपुर से हरियाणा के लिए एक और एक्सप्रेस गाड़ी मिलेगी। वर्तमान में बांद्रा से जम्मू-तवी के बीच विवेक एक्सप्रेस वाया जोधपुर-हिसार संचालित की जा रही है।
कामली घाट में मीटरगेज का रोमांच
मारवाड़ से मावली जंक्शन का रोमांचक सफर किया भास्कर संवाददाता सौरभ पुरोहित और फोटो जर्नलिस्ट पूरण सिंह : मारवाड़ जंक्शन रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर 4..समय- मंगलवार सुबह पांच बजे..। मावली जंक्शन तक जाने वाली मीटर गेज ट्रैक की ट्रेन रवाना हुई। जैसे ही ट्रेन राणावास होते हुए फुलाद पहुंची, तो बाहर के दृश्य शिमला और दार्जिलिंग की पहाड़ियों के बीच रेंगती टॉय ट्रेन की याद दिलाने लगे।
कामली घाट पहुंचते-पहुंचते इसकी स्पीड और कम हो गई। वहां कुछ लोग तो चलते-चलते इसमें चढ़-उतर थे। देवगढ़ होते हुए मावली तक करीब 150 किमी के सफर में छह घंटे लगे। इसी दौरान पता चला कि रियासतकाल में राजाओं व अंग्रेजों के शिकार के शौक को पूरा करने के लिए बिछाई गई रेल लाइन पर चलने वाली इस ट्रेन में रोजाना कई लोग, विशेषकर पर्यटक मनोरम दृश्य देखने के लिए सफर करते हैं।
ट्रेन में सवार बीएड और आईटीआई के स्टूडेंट्स भीमसिंह और शायर कहते हैं कि वे लोग तो बरसात के दिनों में दोस्तों के साथ इस ट्रेन में पिकनिक मना लेते हैं। यात्री पृथ्वीसिंह, डीएन चावला, लालाराम और दूधसिंह ने बताया कि इस रूट में कई ऐसे गांव भी हैं जहां न तो मोटरसाइकिल जाती है और न ही कार, वहां तक जाने के लिए भी कई लोग इसमें सफर करते हैं। गार्ड आरके शर्मा का कहना था कि इस ट्रेन को प्रॉपर कनेक्टिविटी मिले तो आगे की ट्रेनें पकड़ने में भी आसानी होगी।
रास्ते फिर भी टेढ़े-मेढ़े
ट्रेनें जो मिलनी चाहिए थीं, नहीं मिली
पिछले कुछ सालों के रेल बजट में जोधपुर से मुंबई जाने के लिए बांद्रा टर्मिनस, कल्याण व दादर तक साप्ताहिक ट्रेनों की संख्या बढ़ती रही है। लेकिन जोधपुर से मुंबई सेंट्रल के लिए एक भी ट्रेन उपलब्ध नहीं है। नई ट्रेनों की घोषणा के बाद जोधपुर से बांद्रा, कल्याण व दादर के लिए 12 ट्रेनें हो जाएंगी। इनमें पांच जोधपुर से रवाना होती हैं, जबकि एकमात्र नियमित ट्रेन सूर्यनगरी एक्सप्रेस है।
द्वारका तक नहीं बढ़ पाई जम्मू तवी
जम्मू तवी-जोधपुर-अहमदाबाद (सोमनाथ एक्सप्रेस) को द्वारका तक बढ़ाना। राजधानी एक्सप्रेस सप्ताह में तीन दिन वाया जयपुर-जोधपुर तक चले।
बाड़मेर-गुवाहाटी ट्रेन डिब्रूगढ़ तक।
जयपुर-सियालदह एक्सप्रेस (साप्ताहिक) जोधपुर से नहीं चल पाई।
जोधपुर-हरिद्वार एक्सप्रेस देहरादून तक नहीं बढ़ पाई।
भुज-बरेली एक्सप्रेस सप्ताह में दो दिन वाया जोधपुर चलनी प्रस्तावित थी।
फिर नहीं जुड़ पाया मेवाड़-मारवाड़
मावली-मारवाड़ जंक्शन लाइन को बड़ी लाइन से जोड़ें तो जोधपुर मेवाड़ और आगे मध्य प्रदेश से जुड़ सकेगा।
बिलाड़ा-बर रेल मार्ग जुड़े तो अजमेर से सीधा संपर्क।
जोधपुर-अहमदाबाद मार्ग का दोहरीकरण दक्षिण की ओर यातायात सुगम करेगा।
दईजर से बनाड़ नई लाइन स्वीकृत होने पर जैसलमेर से आने वाली ट्रेनों के लिए नया बाइपास तैयार होगा।
अमृतसर से नहीं जुड़ पाया जोधपुर
अमृतसर से मुंबई वाया बीकानेर-जोधपुर-अहमदाबाद ट्रेन चलाकर इन शहरों को जोड़ा जा सकता है।
वलसाड़-जोधपुर व जोधपुर-बैंगलुरू के बीच रोजाना ट्रेन।
जोधपुर-मुंबई के बीच नियमित सुबह की ट्रेन।
मेड़ता में पटरी पर बस
मेड़ता सिटी से मेड़ता रोड तक रेल बस की यात्रा के बाद संवाददाता मनोज शर्मा और फोटो जर्नलिस्ट विकास व्यास : भीड़, शोरगुल और कोच में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की। यह नजारा है एक ऐसी बस का जो सड़क की बजाय पटरियों पर दौड़ती है।
एशिया महाद्वीप की इस पहली रेल बस में 72 लोगों के बैठने की व्यवस्था है, जबकि अमूमन 130 से अधिक यात्री सफर करते हैं। मंगलवार सुबह 11:01 बजे खचाखच भरी रेल बस मेड़ता सिटी प्लेटफॉर्म पर पहुंची, लेकिन केवल 15 मिनट की इस यात्रा ने बसंत के मौसम में भी यात्रियों के पसीने छुड़ा दिए। वापसी में रवाना हुई तो काफी प्रयास के बाद भी 15 से ज्यादा लोग पीछे छूट गए।
रोजाना करीब दो हजार लोगों को अपनी मंजिल तक पहुंचाने में मदद करने वाली इस रेल बस की शुरुआत वर्ष 1995 में हुई थी। रेल बस सुबह साढ़े 4 बजे से रात पौने 11 बजे तक 12 फेरे लगाती है। रेल बस की यात्रा एक रोमांचक सफर से कम नहीं होती। इसमें किराया और समय दोनों कम लगते हैं। 15 किलोमीटर का सफर पांच रुपए में पूरा हो जाता है, जबकि बस का किराया 13 रुपए है। इसलिए इसमें भीड़ उमड़ती है।
नए ट्रैक, बेहतर सुविधा
लूणी में नहीं अटकेगी ट्रेन
भगत की कोठी से बासनी व बासनी से सालावास खंड के बीच दोहरीकरण को मंजूरी दी गई है। लूणी के रास्ते जोधपुर आने वाली ट्रेनों के अटकने से निजात मिल सकेगी।
लूणी बाइपास सहित लूणी से हनवंत के बीच दोहरीकरण का काम शुरू होगा।
एस्केलेटर लेगा मूर्त रूप
जोधपुर रेलवे स्टेशन पर स्वचालित सीढ़ियां (एस्केलेटर) लगाने की घोषणा गत रेल बजट में हुई थी, लेकिन यह अभी तक पूरी नहीं हुई है। इस बार रेल मंत्री ने ए-1 स्तर के 179 स्टेशनों पर एस्केलेटर लगाने की घोषणा की है। जयपुर व अजमेर में एस्केलेटर लगाने का काम शुरू होने जा रहा है। जोधपुर के लिए भी स्वीकृति आ गई है।
पीपाड़ रोड से नागौर का सर्वे मंजूर
जोधपुर से नागौर के बीच नए रेल मार्ग के सर्वे को मंजूरी दी गई है। यह रेल मार्ग पीपाड़ रोड से भोपालगढ़-आसोप-शंखवास-मूंडवा होते हुए नागौर को जोड़ेगा। वर्तमान में जोधपुर से नागौर का रूट वाया मेड़ता रोड-मूंडवा होते हुए है। इस रूट से करीब यह दूरी 161 किमी है।
पीपाड़ रोड से मूंडवा तक की दूरी (बस मार्ग) 86 किमी है, जबकि जोधपुर से पीपाड़ रोड की दूरी 48 किमी है। मूंडवा से नागौर के बीच बीस किमी दूरी पर पहले से ही रेल संचालन हो रहा है।
राह में अब भी पुरानी अड़चनें: ट्रैक जिनके सर्वे रह गए अधूरे
बिलाड़ा-बर
क्या है योजना : इस रूट पर रेल लाइन के सर्वे के लिए 2004-05 के बजट में घोषणा की गई। करीब 50 किमी लंबी लाइन के लिए सर्वे भी पूरा हो गया।
कहां अटकी : सर्वे पूरा करने के बाद सरकार ने इसके लिए कोई राशि जारी नहीं की।
फलौदी-समदड़ी
क्या है योजना : वर्ष 2009-10 के अंतरिम रेल बजट में तत्कालीन रेल मंत्री लालूप्रसाद यादव ने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस रूट के सर्वे की घोषणा की थी।
कहां अटकी : बजट ही नहीं मिला। अगर बजट में राशि की घोषणा होती तो यह सेना के लिए काफी महत्वपूर्ण होता।
टिकट ट्रेन में ही मिलेगा
बिलाड़ा-जोधपुर पैसेंजर में संवाददाता सुरेश शर्मा : बिलाड़ा से पीपाड़ सिटी के बीच सालों पुराना ट्रैक बदल गया। ट्रेन मीटर गेज से ब्रॉडगेज पर दौड़ने लगी, लेकिन इस ट्रेन को लेकर चल रहीं परंपराएं नहीं बदली। यही वजह है कि इस ट्रेन को बिलाड़ा से पीपाड़ सिटी तक 41 किमी का सफर तय करने में तीन घंटे लग जाते हैं। इस दौरान 25 मानव रहित फाटक आते हैं।
मानव रहित फाटक से पहले ट्रेन रुकती है। उसमें से रेलकर्मी उतरता है। फाटक बंद करता है। ट्रेन आगे बढ़ने पर फाटक खोलता है। रेलकर्मी के सवार होने के बाद ट्रेन आगे बढ़ती है। दिलचस्प पहलू यह है कि यात्रियों को टिकट भी ट्रेन में ही मिलता है।
ट्रेन के मार्ग पर बने अनेक स्टेशनों पर न तो स्टेशन मास्टर, न ही गेटमैन और न ही टिकट घरों में टिकट वितरण कर्ता है। ऐसे में रेल में बैठा टीटीई ही टिकट काटता है। जोधपुर से रवाना होने वाली यह ट्रेन पीपाड़ सिटी तक कुल 90 किमी का सफर तय करती है, समय लगता है करीब पांच घंटे। व्यापारी महेंद्र सिंह कहते हैं कि यह ट्रेन अनोखी है, लेकिन समय बहुत लगता है। बिलाड़ा से पीपाड़ तक ट्रेन बैलगाड़ी की तरह चलती है।
सफाई, सुरक्षा, ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने के नहीं किए ठोस उपाय
रेल मंत्री पवन बंसल की ओर से पेश रेल बजट 2013-14 को शहर के विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने आधा-अधूरा बताया है। दैनिक भास्कर की ओर से आयोजित टॉक शो में उन्होंने कहा कि बजट न केवल जोधपुर, बल्कि संपूर्ण देश के परिप्रेक्ष्य में अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता।
बजट में भले ही कुछ नई ट्रेनें दी गई हों, लेकिन स्वच्छता, सुरक्षा, ट्रेनों की स्पीड आदि के बारे में ठोस प्रावधान किए बिना यह बेमानी है। इन विशेषज्ञों का कहना था कि सबसे ज्यादा जरूरत तो यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाएं और रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधारने की है।
निष्कर्ष : इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट की जरूरत
तेज विकास के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट की जरूरत है।
एजुकेशन व मेडिकल हब के रूप में उभर रहे जोधपुर की इंदौर, पुणे, बैंगलुरू, चेन्नई, हैदराबाद जैसे शहरों से बेहतर कनेक्टिविटी चाहिए।
यात्रियों के लिए मेडिकल सुविधाओं पर ठोस नीति बनानी चाहिए थी।
महिलाओं की सुरक्षा और अधिक ठोस नीति बनाने की जरूरत।
सफाई व स्वच्छता के लिए अधिक प्रावधान व उपाय करने थे।
प्लास्टिक पर प्रतिबंध अच्छा, लेकिन खाने की क्वालिटी सुधारें।
ये हुए शामिल
जेआईए के पूर्व अध्यक्ष दामोदर लोहिया, एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज एलुमनी एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष सोहन भूतड़ा, एसबीबीजे के महाप्रबंधक अजय नकीब, जय कार्स (स्कोडा डीलर) के डायरेक्टर अलका बेनीवाल, एएसजी ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल के डायरेक्टर प्रियंका सिंघवी, हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर सिद्धार्थ मेहता, डॉ.दिवाकर बंसल, डॉ.वीरेंद्र राजपुरोहित, नीरज माथुर, डॉ.रश्मि माथुर, रितिका भंडारी, बबीता पंजाबी, हर्षिता माथुर, नम्रता कश्यप, लक्ष्यता भाटी, तखत सिंह व डॉ.पुनीत रामचंदानी।
यात्रियों ने कहा, हमारे लिए कुछ नहीं
सीधे रेल से : कुछ नहीं किया
मंडोर से सफर करने वाली पूजा त्रिपाठी को अपना और परिवार का रिजर्वेशन करवाने में एक घंटा लग गया, क्योंकि बुजुर्ग और महिलाओं के लिए एक ही लाइन है। इस कतार में काफी देर खड़े रहने के बाद ही नंबर आता है। बजट में ऐसा कुछ नहीं किया गया जो निराशाजनक है। मंडोर से दिल्ली का सफर करने वाली कृतिका उनियान कहती हैं कि महिलाओं के लिए सामान्य टिकट और प्लेटफॉर्म टिकट के लिए अलग से लाइन की व्यवस्था होनी चाहिए।
सूर्यनगरी में सफर करने वाली निरंजना पंवार कहती हैं कि एसी कोच में भी शौचालय स्वच्छ रखने की व्यवस्था नहीं है। इससे सभी यात्रियों को काफी परेशानी होती है। मंडोर एक्सप्रेस से दिल्ली जाने वाली चंद्रा जैन कहती हैं कि किसी भी ट्रेन में महिला कोच नहीं होने से अकेले सफर करने से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
किराया नहीं बढ़ाना महत्वपूर्ण कदम
जेडीए अध्यक्ष राजेंद्रसिंह सोलंकी ने रेल बजट में किराए में बढ़ोतरी नहीं करना एक महत्वपूर्ण कदम बताया। कांग्रेस के प्रदेश सचिव अनिल टाटिया ने भी इस बजट को महत्वपूर्ण व जन हितैषी बताया। बीसूका जोधपुर जिला उपाध्यक्ष व पूर्व विधायक जुगल काबरा ने बजट को विकासोन्मुख व रोजगारोन्मुख बताया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष सईद अंसारी ने बजट को सराहा।
इन्होंने बताया जनविरोधी
भारतीय जनता पार्टी जोधपुर शहर जिलाध्यक्ष नरेंद्रसिंह कच्छवाहा, महामंत्री पुखराज जांगिड़, आईटी सेल प्रदेश सह संयोजक शिवकुमार सोनी, आईटी सेल प्रदेश सदस्य मुकेश राव ने मंगलवार को लोकसभा में पेश रेल बजट को चुनावी व जनविरोधी बताया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के शहर जिलाध्यक्ष पवन आसोपा ने रेल मंत्री द्वारा पेश बजट को पूर्ण रूप से जनविरोधी व भेदभाव पूर्ण बताया।