(फाइल फोटो- मौताणा वसूलने के लिए तीर और लाठी लेकर जाते आदिवासी समाज के लोग।)
आपके खेत में यदि सांप काटने से भी किसी की मौत हुई तो दोगे आप ही मुआवजा, यदि नहीं दिया तो आपका घर भी जलाया जा सकता है। यह कुप्रथा है राजस्थान में, जिसे मौताणा कहते हैं। यानी मौत के बदले दिया जाने वाला मुआवजा।
जोधपुर. राजस्थान में मौताणा प्रथा लोगों के लिए अभिशाप बन गई है। इसमें किसी व्यक्ति की मौत होने पर किसी को भी जिम्मेदार मानकर परिवार वाले 20 लाख रुपए तक का मुआवजा वसूलते हैं। हाईकोर्ट ने भी मौताणा कुप्रथा को रोकने के लिए कानून बनाने की समय सीमा तय कर दी है। कोर्ट ने राज्य सरकार को 11 फरवरी तक का समय दिया है। कानून नहीं बनाने पर राज्य को सामाजिक रूप से पिछड़ा राज्य घोषित कर दिया जाएगा। आइए जानते हैं क्या है मौताणा वसूल करने प्रथा...
क्या है मौताणा प्रथा ...
यदि कोई बच्चा आपके खेत में से होकर निकल रहा है और उसे सांप ने डस लिया, तो हो सकता है कि उस बालक की मौत पर आपको भारी हजार्ना भरना पड़ सकता है। साथ ही किसी व्यक्ति ने दूसरे व्यक्ति की हत्या कर दी है तो जेल जाने के स्थान पर वह सामने वाले पक्ष की ओर से तय की गई जुमार्ना राशि अदा कर खुला घूम सकता है।
गभर्वती महिला की किसी भी कारण से मौत हो जाने पर उसके पति से महिला का पीहर पक्ष जुमार्ना वसूल कर सकता है। क्योंकि गर्भ ठहराने का वही जिम्मेदार है और यदि पंचों की ओर से तय जुमार्ना अदा नहीं किया गया तो हो सकता है कि सामने वाला पक्ष आपके गांव पर हमला बोल दे। घरों को जला दे और गांव छोड़ने को मजबूर कर दे।
कई बार “करे कोई भरे कोई” की तर्ज पर आरोपी के रिश्तेदारों को भी जुमार्ना भरना पड़ता है। सुनने में यह तर्क भले ही अजीब लगे लेकिन राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में आज भी ऐसे ही फैसले किए जा रहे हैं। न पुलिस का हस्तक्षेप और न ही कानून, इसमें किसी का जोर नहीं चलता। चलती है तो सिर्फ समाज के पंचों और प्रभावशाली लोगों की।
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