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फ्लैट में नहीं रहने वालों को सोसायटी मेंबर बनाया रेजिडेंट्स की समस्या- शिकायत किससे करें

7 वर्ष पहले
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जोधपुर. हाउसिंग बोर्ड के फ्लैट लेने के बाद आवंटी कॉमन फैसिलिटीज के लिए भी बोर्ड पर ही निर्भर हैं। कारण कि देखरेख व रखरखाव के लिए गठित सोसायटी पर बोर्ड का ही नियंत्रण है। हर खर्च के लिए भी प्रशासनिक स्वीकृति लेनी पड़ रही है। फ्लैट मालिक अपनी मर्जी से खर्चा भी तय नहीं कर सकते। सब कुछ बोर्ड अपने नियमानुसार तय कर रहा है। बोर्ड के अधिशासी अभियंता को सोसायटी अध्यक्ष और सात आवंटियों को कार्यकारिणी सदस्य बनाए जाने का प्रावधान है। बोर्ड के नियम सोसायटी संचालन के साथ अन्य मामलों में भी आवंटियों को प्रभावित कर रहे हैं। इधर, रविवार को जोधपुर आए बोर्ड के आयुक्त आनंद कुमार को कुड़ी भगतासनी सेक्टर आठ एमआईजी स्कीम के आवंटियों ने फ्लैट की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर ज्ञापन सौंपा। साथ ही सोसायटी का संचालन उन्हें देने की मांग की। इस संबंध में आयुक्त का कहना है कि लोगों के सुझाव पर नियमों में शिथिलता दी जा सकती है।
पैसा आवंटियों का कब्जा बोर्ड का
फ्लैट मालिक को पजेशन के साथ सोसायटी की राशि भरनी होती है। पचास फीसदी आवंटियों की राशि आने के बाद ही सोसायटी का रजिस्ट्रेशन होता है। इस सोसायटी का तीन वर्ष तक संचालन बोर्ड ही करता है।
परेशानी क्या- मारवाड़ अपार्टमेंट की सोसायटी में जिन्हें सदस्य बनाया, उनमें से अधिकांश वहां नहीं रहते। अध्यक्ष कभी लोगों से मिलते नहीं। सीवरेज के लिए राशि ली गई, लेकिन समस्या जस की तस। दोनों लिफ्ट नहीं चलती। लोगों का कहना है कि हम अपना पैसा देने के बावजूद हर काम के लिए कार्यालय क्यों जाएं?
आवंटन के बाद भी पूरी किस्त
पांच किस्तें भरने के बाद फ्लैट का फ्लोर व नंबर आवंटित हो जाते हैं। हर फ्लैट की कीमत अलग-अलग होती है, फिर भी पूरी किस्तें भरना अनिवार्य। बोर्ड का तर्क है कि रिफंड देते हैं।
परेशानी क्या- उद्यान अपार्टमेंट में तीसरी मंजिल पर फ्लैट की अनुमानित कीमत 14.25 लाख थी। सितंबर तक छह किस्तों के रूप में आवंटियों के 16 लाख रुपए जमा हो गए। अब बोर्ड दिसंबर में अंतिम किस्त के 1.70 लाख मांग रहा है। जमा नहीं करवाने पर पेनल्टी भी लगाएगा।
काम नहीं पर कब्जा लेना होगा
फ्लैट या मकान के पजेशन लेटर जारी होने के बाद अनिवार्य किया गया है कि कब्जा लेना जरूरी है। भले ही निर्माण में कमियों को लेकर उपभोक्ता परेशान हों। शिकायतों के बावजूद बोर्ड कमियां दूर नहीं करवाता। आवंटियों को उल्टे पेनल्टी झेलनी पड़ती है।
परेशानी क्या- मारवाड़ अपार्टमेंट में काम पूरा नहीं होने व कमियाें के बावजूद पजेशन दिए गए। लोगों ने निर्माण में खामियाें पर विरोध भी जताया। छतों से पानी टपक रहा था, इसलिए उन्होंने पजेशन नहीं लिया। परेशानी तो दूर नहीं हुई, लेकिन पजेशन नहीं लेने के कारण बाद में पेनल्टी भुगतनी पड़ी।
निर्माण में देरी, फिर भी ठेकेदारों को ज्यादा राशि
बोर्ड की योजनाओं में निर्माण में देरी होने से सीधे-सीधे लागत बढ़ जाती है। लागत का अंतर आवंटियों को भुगतना होता है। उनकी जेब पर भार बढ़ता हे, लेकिन बोर्ड के ठेकेदारों से हुए एग्रीमेंट में एक्सेलेशन के नाम पर दस फीसदी तक राशि देना जरूरी।
परेशानी क्या| कुड़ी सेक्टर 8 एमआईजी योजना में दो साल की देरी हुई। कीमत 12.95 लाख से 22 लाख तक पहुंच गई। फिर भी ठेकेदारों को एक्सेलेशन के नाम पर तीन करोड़ मिलेंगे।
बोर्ड आयुक्त ने कहा- नियमों में शिथिलता देंगे
बोर्ड सोसायटी नियमों में बदलाव क्यों नहीं करता? संचालन मालिकों को क्यों नही सौंपता?
अगर किसी भी योजना के सभी लोग मिलकर सोसायटी चलाएं तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। नियमों में शिथिलता भी दी जा सकती है। वैसे बोर्ड का अध्यक्ष कस्टोडियन होता है। अपनी मर्जी से कुछ नहीं कर सकता।
फ्लैट के फ्लोर आवंटन के बाद भी पूरी किस्तें क्यों जमा करवाई जाती है, जबकि लोग तो अनुमानित लागत से ज्यादा राशि जमा करवा चुके होते हैं?
यह सही है कि परेशानी होती है। इस संदर्भ में जल्दी ही नियमों में संशोधन करेंगे, जिससे अतिरिक्त राशि जमा नहीं करवानी पड़े।

योजना पूरी होने में देरी का नुकसान आवंटी उठाते हैं। कुड़ी एमआईजी में दस लाख रुपए तक कीमत बढ़ गई? ठेकेदार को एक्सेलेशन के नाम पर मोटी राशि देने का प्रावधान किया है।
निर्माण में राज्य सरकार की रोक के चलते देरी हुई। इसके बाद डीएलसी रेट बढ़ने से लागत बढ़ी है। हमारा प्रयास यही है कि बुकलेट में बताई कीमत से दस फीसदी से ज्यादा लागत नहीं हो, समय पर काम पूरा हो जाए।