पाली/जोधपुर.जिला परिषद अधिकारियों पर विकास कार्यो की मंजूरी नहीं देने का आरोप लगाकर गुरुवार को इस्तीफा सौंपने के 24 घंटे बाद जिला प्रमुख खुशवीर सिंह ने इस्तीफा वापस ले लिया। इससे पूर्व उनके समर्थन में जिले के कई जनप्रतिनिधि उतर आए और उन पर इस्तीफा वापस लेने का दबाव बनाया।
डाक बंगले में इकट्ठा हुए जनप्रतिनिधियों ने उनके इस्तीफा वापस नहीं लेने पर खुद भी इस्तीफे देने की पेशकश की। वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने भी सिंह को समझाया। इसके बाद शुक्रवार को उन्होंने कलेक्टर के पास इस्तीफा वापस लेने का पत्र भिजवाया।इधर, इस्तीफा देकर वापस लेने के इस मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
जिला परिषद के प्रस्तावित कार्यो की मंजूरी नहीं मिलने से नाराज होकर जिला प्रमुख खुशवीरसिंह जोजावर के कलेक्टर को त्यागपत्र सौंपने के मामले में शुक्रवार को कई पंचायत समितियों के प्रधान,नगरपालिका अध्यक्ष तथा बड़ी संख्या में पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी खुलकर सामने आ गए। इन लोगों ने भी पद से इस्तीफा देने की पेशकश कर प्रमुख पर दबाव बनाते हुए उनका त्यागपत्र वापस लेने के लिए रजामंद कर लिया। इसके साथ ही जिला परिषद के सीईओ श्यामसिंह राजपुरोहित को टारगेट बनाया है। वहीं डाक बंगले में इन लोगों का देर शाम तक जमावड़ा लगा रहा।
जानकारी के अनुसार जिला प्रमुख जिलेभर के जनप्रतिनिधियों के यहां से आई विकास कार्यो की मांग के प्रस्ताव जिला परिषद सीईओ के पास भिजवा रहे थे। मगर 3 महीने से उन पर प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिलने से क्षुब्ध होकर उन्होंने गुरुवार शाम कलेक्टर को अपना त्यागपत्र थमा दिया। अचानक हुए इस घटनाक्रम को लेकर कलेक्टर भी एकबारगी हैरत में पड़ गए थे। उन्होंने प्रमुख को रोकने का प्रयास भी किया,मगर वे निकल गए। इसके बाद उन्होंने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया था।
त्यागपत्र देने के बाद वे अपने पैतृक गांव जोजावर जाने के बजाय कहीं अन्यत्र चले गए थे। इस बारे में शुक्रवार सुबह जानकारी मिली तो कई लोग जोजावर पहुंच गए। इसके बाद प्रमुख से संपर्क कर उनको भी बुलाया गया। बताया जाता है कि इस दौरान ग्रामीण क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने उन पर त्यागपत्र वापस लेने का दबाव डाला। इन जनप्रतिनिधियों ने अपने त्यागपत्र की भी पेशकश कर दी। इसके बाद वे सभी पाली पहुंचे तथा उनको त्यागपत्र वापस लेने के लिए राजी किया। इस दौरान कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष सी.डी देवल, नगरपरिषद के पूर्व सभापति प्रदीप हिंगड़,वाइस चेयरमैन शमीम मोतीवाला, जिला महामंत्री निहालचंद जैन, मदनसिंह जागरवाल,मोटू भाई, महिला कांग्रेस की जिलाध्यक्ष नीलम बिड़ला, कांग्रेस नेता लहर कंवर, मारवाड़ जंक्शन ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण तंवर, रानी ब्लॉक अध्यक्ष मुन्नालाल मेंशन समेत कई कांग्रेस नेता भी मौजूद थे।
तेजी से घूमे घटनाक्रम का नाटकीय पटाक्षेप
-गुरुवार शाम 4 कलेक्टर को त्यागपत्र सौंपा
-रात भर वे एक निजी फार्म हाउस पर रुके
-शुक्रवार सुबह 7 बजे से उनके निवास पर नेताओं का जमावड़ा
-सुबह 9 बजे प्रमुख अपने घर पहुंचे
- 12 बजे कई जनप्रतिनिधियों के त्यागपत्र की पेशकश
- 2 बजे तीन दर्जन वाहनों में पाली की तरफ रवाना
-3.30 बजे पाली के डाक बंगले में बैठक
-4 बजे त्यागपत्र वापस लेने की चिट्टी भेजी
-4.30 बजे सभी जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर से मुलाकात की
सीईओ पर जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का आरोप, ट्रांसफर की मांग
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष सीडी देवल की अगुवाई में जनप्रतिनिधियों व कई कांग्रेस नेताओं ने कलेक्टर अम्बरीष कुमार से मुलाकात कर जिला परिषद के सीईओ श्यामसिंह राजपुरोहित पर जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। इन लोगों ने कहा कि तीन महीने से जिला परिषद की तरफ से भेजी जा रही स्वीकृतियों के बारे में सीईओ जानबूझकर निर्णय नहीं कर रहे हैं। इससे जनप्रतिनिधियों को ग्रामीणों के सामने जाना भी भारी पड़ रहा है। देवल ने राजपुरोहित पर कांग्रेस सरकार को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस समर्थित जिला प्रमुख होने के बाद भी उनकी किसी बात को नहीं मान रहे हैं। इससे जिला प्रमुख के अधिकारों का हनन भी हो रहा है। उन्होंने रायपुर व जैतारण तहसीलों को भ्रष्टाचार का अड्डा भी करार दिया।
कई योजनाओं का बजट सबसे बड़ा मुद्दा
त्यागपत्र के पीछे जो कहानी निकलकर सामने आई है,उसमें जिला परिषद में 12 वित्त आयोग,13 वां वित्त आयोग तथा र्निबध राशि योजना समेत कई ऐसी योजनाएं हैं,जिसमें जिला परिषद सदस्य व अन्य जनप्रतिनिधियों की अनुशंषा के आधार पर विकास कार्य कराए जाते हैं। जिला प्रमुख ने जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों के अनुसार प्रस्ताव बनाकर उनकी प्रशासनिक स्वीकृति के लिए प्रस्ताव बनाकर जिला परिषद के सीईओ श्यामसिंह राजपुरोहित के समक्ष भेज दिए थे। इन प्रस्तावों की मंजूरी नहीं मिलने से जिला प्रमुख सबसे ज्यादा खफा थे। गुरुवार को उनके कक्ष में मौजूद कई जनप्रतिनिधियों के सवाल उठाने के बाद उन्होंने हाथों-हाथ ही अपना त्यागपत्र टाइप करवाया तथा कलेक्टर को सौंपकर चले गए थे।
इन लोगों ने की अपने त्यागपत्र की पेशकश
मारवाड़ जंक्शन प्रधान हरिओम कंवर, सुमेरपुर प्रधान भंवरीदेवी, देसूरी प्रधान बुधकंवर, रायपुर प्रधान लाल मोहम्मद, रानी नगरपालिका चेयरमैन मनीषा जैन,रानी पालिका उपाध्यक्ष नूर मोहम्मद के अलावा कई जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच तथा अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं। उन्होंने जिला प्रमुख के पक्ष में अपना त्यागपत्र देने की पेशकश की।
- अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बात नहीं मान रहे। उनके कार्यालय से भेजी गई कई अनुशंषा पर भी प्रशासनिक स्वीकृति नहीं दी जा रही थी। कई बार रिमांइडर भेजने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई तो व्यथित होकर त्यागपत्र सौंप दिया। शुक्रवार को जनप्रतिनिधियों ने मुझसे कहा कि जिला प्रमुख बनाने में कांग्रेस तथा सभी जनप्रतनिधियों की भूमिका रही है। इसलिए त्यागपत्र देने का निर्णय व्यक्तिगत नहीं ले सकते। पंचायतीराज मंत्री व जिला कांग्रेस अध्यक्ष से भी बात हुई। इसलिए मैंने अपना त्यागपत्र वापस लेने की चिट्टी कलेक्टर को भेजी है।
-खुशवीरसिंह जोजावर,जिला प्रमुख
-अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों की तरफ से भेजी जाने वाली अनुशंसा को माननी चाहिए। जिला प्रमुख से सुबह बात होने पर उनको समझाया था। उन्होंने अपना त्यागपत्र वापस ले लिया है। चुनावी साल है अगर जनप्रतिनिधियों का ही काम नहीं होगा तो इसका असर संगठन पर भी पड़ सकता है।
- अजीज दर्द,जिला कांग्रेस अध्यक्ष