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डाउनलोड करेंजोधपुर । जन्म देने वाली मां द्वारा छोड़ दिए जाने के बाद दुनिया की भीड़ में खोई अबोध पिंकी आज अपनी नई मां की गोद मे अठखेलियां कर रही हैं। किस्मत ने उसके साथ ऐसा क्रूर मजाक किया कि दृष्टिहीन पिंकी जन्म देने वाली अपनी मां का चेहरा भी नहीं देख पाईं। ढाई साल पहले जब उसकी मां ने अपने से दूर किया तो बेगानी दुनिया में उसका पहला सहारा उदयपुर की मदर टेरेसा संस्था बनी, वहां से उसे जोधपुर भेजा गया तो आबूरोड के मार्बल व्यवसायी की पत्नी और तीन बेटों की मां एक बेटी की तलाश में उस तक पहुंच गईं।
पहली नजर में ही उस मां का ऐसा ममत्व उमड़ा कि उसने पिंकी को सीने से लगा लिया। अब पिंकी माता-पिता के दुलार और तीन भाइयों के प्यार में पल रही हैं। मुस्लिम पिता, ईसाई मां और हिंदू बेटी की यह बेमिसाल कहानी आबूरोड के हर आदमी की जुबान पर है। यह परिवार पिंकी का इलाज करवा रहा है और जब वह आंखें खोलेगी और दुनिया देखेगी तो पहला चेहरा इसी मां का होगा।
मैरेलिन की दुलारी 'हनी'
पिंकी की मां मैरेलिन उसे प्यार से 'हनी' कहकर बुलाती है। मां की आवाज सुनते ही पिंकी भी 'मम्मा- मम्मा' कहने लगती है। मैरेलिन बताती है कि पिंकी जब आई थी तो दूध नहीं पीती थी। लेकिन अब उसे चॉकलेट मिल्क काफी पसंद है। दिन भर अठखेलियां और बाल सुलभ शरारतें करने के बावजूद पिंकी को मां की लोरी और परियों की कहानी सुने बिना नींद नहीं आती। देर रात तक पिंकी मैरेलिन के सीने से लगकर लोरी सुनने के साथ गुनगुनाते हुए अपनी मां के साथ खेलती रहती है।
गोद देने की प्रक्रिया अब शुरू होगी
नारी निकेतन की अधीक्षक मनमीत कौर ने बताया कि पिंकी को देखरेख के लिए अच्छा परिवार मिला है। पिंकी को गोद देने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू कर दी जाएगी। कागजी कार्यवाही पूरी होने पर पिंकी को विधिपूर्वक अपनी मां का आंचल व खुशहाल परिवार मिल जाएगा।
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