15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ। इस आजादी के साथ हमें विभाजन का दर्द भी झेलना पड़ा। देश की सभी रियासतो को अंग्रेजों ने ये हक दिया कि वो चाहे तो भारत में शामिल हो चाहे तो पाकिस्तान में शामिल हो और चाहे तो स्वतंत्र रहें। 3 जून, 1947 को की गई यह घोषणा ही असली फसाद की जड़ बनी।
जम्मू-कश्मीर खुद को स्वंतत्र रखना चाहता था। यही भारत पाकिस्तान के बीच विवाद का बड़ा कारण बन गया। पाकिस्तान ने कश्मीर पर हमला कर दिया। इसके बाद महाराज हरि सिंह ने भारत से मदद मांगी। भारतीय सेना मदद के लिए कश्मीर पहुंची यह युद्ध कई मोर्चों पर एक साथ लड़ा गया। उनमें से एक मोर्चा दारापारी का था, जहां कम्पनी हवलदार पीरू सिंह नियुक्त थे। पीरू सिंह ने इस युद्ध में ऐसा पराक्रम दिखाया कि पाकिस्तानीयों के छक्के छूट गए।
आगे की स्लाइड्स में जानें क्या हुआ था उस युद्ध के दौरान और कैसे कम्पनी हवलदार पीरू सिंह ने छुड़ाए थे पाकिस्तानी घुसपैठियों के छक्के