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जब भारतीय शब्दों के 'बवंडर' में उड़ गया था अमेरिका का 'खुफिया दिमाग'

8 वर्ष पहले
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भारत ने मई, 1998 में राजस्थान के पोखरण में तीन दिनों के अंदर पांच परमाणु हथियार परीक्षण किए लेकिन अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआइए को इनकी तैयारियों की भनक तक नहीं लग सकी थी। उसे इनकी जानकारी उस समय हुई, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उस साल 11 मई को टेलीविजन पर परमाणु हथियारों के परीक्षणों की घोषणा की। दुनिया की सबसे तेज-तर्रार माने जाने वाली अमेरिकी खुफिया एजेंसी की इस नाकामी के पीछे भारतीय शब्दों का वह 'बवंडर' भी था, जिसकी चपेट में उसका 'खुफिया दिमाग' उड़ गया और वह भारत की मंशा को समझ नहीं पाया।
भारतीय परमाणु हथियार परीक्षण कार्यक्रम 'ऑपरेशन शक्ति' में शामिल वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने इस अभियान के दौरान कोडवर्ड के रूप में ऐसे भारतीय शब्दों का इस्तेमाल किया था, जिसका संकेत समझ पाने में अमेरिकी जासूस नाकाम साबित हुए। इतना ही नहीं, अन्य देशों के जासूस भी इन कोडवर्डों का जाल नहीं तोड़ पाए। भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन शक्ति' के दौरान व्हाइट हाउस, ताजमहल, कुंभकरण, नौताला सरीखे शब्दों का इस्तेमाल कोडवर्ड के रूप में अपनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया था।
आगे की स्लाइडों में जानिए... कोडवर्ड के रूप में इस्तेमाल किए गए शब्दों के क्या थे संकेतः