जोधपुर के एक ग्राउंड पर प्रैक्टिस करते खिलाड़ी।
जोधपुर। पोलो एक ऐसा खेल है, जिसे घोड़ों पर बैठ कर खेला जाता है। इस खेल में खिलाड़ी प्रतिद्वंद्वी टीम के विरुद्ध गोल करते हैं। इसे ब्रिटिश काल के दौरान काफ़ी ख्याति मिली। इसमें खिलाड़ी एक गेंद को बड़े हॉकी जैसे डंडों से मार कर सामने वाली टीम के गोल में डालने की कोशिश करते हैं। उल्लेखीनय है कि इन दिनों जोधपुर में पोलो सेशन चल रहा है और यह 1 (31 दिसम्बर) महीने तक चलेगा। इसलिए DainikBhaskar.com आपको इस खेल से जुड़ी कुछ खास जानकारियों से रूबरू करा रहा है।
अमूमन दो घंटे तक खेले जाने वाले इस खेल के बारे में कहा जाता है कि यह महज खेल नहीं है, बल्कि हार-जीत से अलग इसे एन्जॉय किया जाता है। चार-चार खिलाड़ियों की दो टीमें जब मैदान में उतरती हैं, तो स्पीड व एक्शन के इस खेल का रोमांच देखते ही बनता है।
इस खेल में खिलाड़ी के साथ-साथ घोड़े का भी अहम रोल है। यदि घोड़ा खिलाड़ी के इशारों को समझते हुए चलता है तो खिलाड़ी के लिए गोल करना आसान हो जाता है। यदि इस खेल से घोड़ों को हटा दिए जाए तो यह महज स्टिक और गेंद का सामान्य खेल बन कर रह जाएगा। पोलो खेलने वाले सभी खिलाड़ी मानते हैं कि इस खेल में 80 फीसदी योगदान घोड़े का होता है।
आइए, हम आपको बताते हैं कि इस खेल के लिए घोड़ों को कैसे प्रशिक्षण दिया जाता है, ये क्या खाते हैं और इनकी सेहत का कितना ध्यान रखा जाता है।
कई गुणों वाला घोड़ा ही बन पाता है लम्बी रेस का घोड़ा
पोलो खेल के लिए घोड़े का चतुर, अनुशासित और संवेदनशील होना अनिवार्य है। इतने गुणों वाला घोड़ा तैयार करना आसान नहीं है। यह एक लंबी व श्रमसाध्य प्रक्रिया है। इसमें कम से कम दो साल तक लग जाते हैं। पोलो खेल में अमूमन 54 से 56 इंच ऊंचाई वाले घोड़े काम में लिए जाते हैं। पूर्व में पोलो खेल में 54 इंच के अधिक ऊंचाई वाले घोड़े को नहीं लिया जा सकता था, लेकिन अब ऐसी कोई बंदिश नहीं है। हालांकि, खिलाड़ी कम ऊंचाई वाले घोड़े ही पसंद करते हैं। उनका मानना है कि इस तरह के घोड़े अपनी पीठ पर खिलाड़ी को बोझ उठाए आसानी से तेज गति से भाग सकते हैं।
अधिकांश खिलाड़ियों की पसंद इंग्लिश थ्रू ब्रीड के घोड़े होते है। हालांकि, कुछ खिलाड़ी देसी नस्ल के घोड़े भी काम में लेते हैं। पोलो के मशहूर खिलाड़ी बशीर अली का कहना है कि इस खेल में घोड़े के कम से कम तीन मील तक की दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में, घोड़े का स्टेमिना ज्यादा होना बहुत जरूरी है। साथ ही, उसे तेज गति के बीच में एकदम से ठहर कर पलटने की कला में महिर होना चाहिए। वहीं, गेंद को स्वयं देख कर उसकी तरफ बढ़ते घोड़े को अपने सवार को निशाना लगाने के लिए गेंद के पास पहुंचने से ठीक पहले एक निश्चित दूरी पर थोड़ा धीमा पड़ जाना चाहिए, ताकि खिलाड़ी आसानी से शॉट मार सके।
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