जोधपुर. जेएनवीयू में कुलपति के दावेदार प्रो. आरपी सिंह के कई गंभीर मामलों के आरोपी होने के खुलासे के बाद उनके नाम सहित पूरा पैनल तैयार करने वाली वीसी सर्च कमेटी इससे पल्ला झाड़ती दिख रही है।
कमेटी अध्यक्ष व जवाहरलाल नेहरू विवि दिल्ली के प्रो. अमरेश दुबे ने भास्कर को बताया कि कमेटी व्यक्ति की एकेडमिक व प्रशासनिक पृष्ठभूमि देखती है ना कि क्रिमिनल पृष्ठभूमि। जबकि पैनल की सेंट्रल विजिलेंस कमेटी जैसी एजेंसी से जांच के बाद ही नियुक्ति होनी चाहिए। कमेटी में प्रो. कैलाश शर्मा, प्रो. एससी जोशी व प्रो. एनके पांडे सदस्य थे। कमेटी ने प्रो. आरपी सिंह, प्रो. एचडी चारण, प्रो. ईश्वर शरण विश्वकर्मा व प्रो. कौशल किशोर मिश्र का पैनल बनाकर राजभवन को सौंपा है।
प्रो. अमरेश दुबे से भास्कर की खास बातचीत
प्रो. सिंह का नाम पैनल में दिया है, जबकि वे आरोपों व विवादों से घिरे हैं।
मैंने नहीं हमने यानि यह सिफारिशें मेरी नहीं चार सदस्य कमेटी की थी, जिसका मैं अध्यक्ष था।
आपको उनके विवादों व आरोपों की जानकारी नहीं थी?
नहीं, हमारे पास जो राजभवन से दस्तावेज आते है, वे एकेडमिक व प्रशासनिक होते हंै, न कि क्रिमिनल बैकग्राउंड से जुड़े।
क्या ये मानते है कि अपराधों से घिरे व्यक्ति को कुलपति बनाना चाहिए?
मैं आम आदमी नहीं हूं, हमें हजारों दस्तावेज मिलते है। जिसमें से हमें चार नाम भेजने होते हंै। राज्यपाल तय किए नामों की जांच करवाए उसके बाद ही कुलपति बनाया जाना चाहिए।
आप पर राजनीतिक दबाव तो नहीं है?
नहीं।
आरोपों की जानकारी मिलने के बाद सिंह को पैनल से हटाने की सिफारिश करेंगे।
नहीं, कमेटी की किसी सिफारिश को बदलने का अधिकार नहीं है।
कमेटी की सिफारिश पर आरोपी को कुलपति बनाया जाता है तो कार्यशैली पर भी सवाल उठेंगे।
कमेटी ने पूरी ईमानदारी से कार्य किया है। मैं पैनल के चारों लोगों को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता हूं।
शिक्षामंत्री कालीचरण सर्राफ ने भी पल्ला झाड़ा
जेएनवीयू के कुलपति पैनल में गंभीर मामलों के आरोपी प्रो. सिंह का नाम है।
उनकी नियुक्ति का काम शिक्षामंत्री का नहीं, राज्यपाल का है।
ऐसे में राज्य सरकार हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते।
सभी विवि आपके अधीन है, फिर आपको विरोध नहीं करना चाहिए?
देखिए, यह काम राज्यपाल का है और हम इस नियुक्ति में किसी की सिफारिश या विरोध नहीं कर सकते।