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सम के धोरों पर संगीत का संगम

9 वर्ष पहले
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जैसलमेर। रेत के महासागर में सोमवार की शाम लोक संस्कृति के रंगों का सागर उफान मार रहा था.....। देश विदेश से आए सैलानी लोक कलाकारों की हर एक प्रस्तुति पर मंत्रमुग्ध हो रहे थे....। डेजर्ट फेस्टिवल के समापन पर हर कोई यह चाह रहा था कि काश यह उत्सव कुछ दिन और चलता। कभी राजस्थानी रंग तो कभी धार्मिकता से ओतप्रोत प्रस्तुति भाव विभोर कर रही थी। शानदार रोशनी में भीगे धोरों पर सजी इस मनोहारी सांस्कृतिक सांझ का आनंद उठाने के लिए बड़ी संख्या में देशी-विदेशी सैलानी और शहरवासी उपस्थित थे। ख्यातनाम कलाकारों ने सबका मन मोह लिया।


जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर रेते के धोरों की धरती सम के मखमली व लहरदार धोरे हर किसी को इतनी भा गए कि इन्हें बरसों तक नहीं भुलाया जाएगा। पूरे सम क्षेत्र में लोकप्रिय धोरों पर जन सैलाब उमड़ पड़ा। शाम चार बजे तक जैसलमेर से सम तक पूरे रास्ते वाहनों की कतार लगी रही। दोपहर बाद सम की ओर पहुंचने का दौर निरंतर जारी रहा। तीन दिवसीय मरू महोत्सव के अंतिम कार्यक्रम के रूप में सम के धोरों पर सोमवार की सांझ हुए आकर्षित कार्यक्रमों ने चारों ओर लोक मंगल का जबरदस्त उत्साह व उल्लास बिखेरा। सम के धोरों पर देशी- विदेशी सैलानियों ने रेगिस्तानी जहाज ऊंट की सवारी करते हुए आनंद लिया और डेजर्ट सफारी ने रोमांच भर दिया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कलेक्टर शुचि त्यागी, एसपी पंकज चौधरी और बीएसएफ डीआईजी बी.एस. राजपुरोहित उपस्थित थे।


डेजर्ट सिम्फनी ने मचाई धूम


धोरों के बीच सजे मंच पर लोक कलाकारों की आकर्षक प्रस्तुति ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। गाजी खां की पेशकश डेजर्ट सिम्फनी को देखकर दर्शक राजस्थानी रंग में सराबोर हो गए। कार्यक्रम की शुरूआत गंगा देवी एंड पार्टी ने लोकदेवता रामदेवजी के भजन पर नृत्य प्रस्तुत कर किया। इसके बाद नवरतन किराडू ने सूफी कलाम छाप तिलक सब छिनी रे तौसे नेना मिला के भजन की शानदार प्रस्तुति दी। वहीं बूंदी की उषा शर्मा ने भी भजन प्रस्तुत कर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। तगाराम भील ने अपने अलगोजा वादन ने कार्यक्रम में जान डाल दी वहीं अंगारों पर हुए नृत्य ने इस संगीत संध्या को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। स्वरूप पंवार ने भवाई नृत्य, कालूनाथ जोगी एंड पार्टी ने कालबेलिया, मनमोहन जोशी ने बांसुरी वादन और बीकानेर के ठाकुरदास ने मिमिक्री कर दर्शकों को खूब हंसाया।

धोरों पर लगा मेला


मरू महोत्सव के अंतिम दिन सम के धोरों पर मेला लगा रहा और पूरे क्षेत्र में देसी- विदेशी सैलानियों का भारी जमघट धोरों के आंगन में मस्ती लूटता रहा। बड़ी संख्या में सैलानियों ने ऊंट गाडिय़ों व ऊटों पर बैठकर रेत के समंदर में भ्रमण का मजा लूटा। धोरों पर सैलानियों ने खाने पीने की दुकानों का लुत्फ उठाया। रंग बिरगे परिधानों में हजारों संख्या में उमड़े सैलानियों की वजह से सम के धोरे दूर से रंगीन दिखाई दिए। कई सैलानियों ने ऊंट पर बैठकर ऊंट दौड़ का आनंद भी लिया।


आतिशबाजी के साथ मरु महोत्सव का समापन
मरू महोत्सव 2013 का समापन भव्य आतिश बाजी के साथ किया गया। सम के लहरदार रेतीले धोरों पर शानदार आतिबाजी की गई। आतिशबाजी के अवसर पर आकाश में रंग बिरंगी छटा को देखकर उपस्थित दर्शक अभिभूत हो उठे।