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डाउनलोड करेंजोधपुर. भदवासिया ओवरब्रिज (आरओबी) का काम 80 फीसदी पूरा होने के बाद प्रशासन को अपनी गलती याद आई है। प्रशासन ने इसे एल सेफ की बजाए टी सेफ का बनाने की संभावना तलाशने कवायद शुरू की है। प्रशासन ने विशेषज्ञों से राय मांगी है कि क्या अब इस आरओबी को टी सेफ में बनाया जा सकता है या नहीं? अगर वर्तमान परिस्थिति में इसे टी सेफ में बनाया जाता है तो कैसे संभव हो सकेगा? अगर टी की बजाय एल सेफ में ही आरओबी बनता है तो ट्रैफिक पर क्या असर पड़ेगा? इसके लिए एक्सपर्ट पैनल बनाकर ऐसे ही कुछ सवालों का सुझाव मांगते हुए कलेक्टर गौरव गोयल ने उनसे एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है।
टी सेफ डिजाइन ही था समस्या का असली हल
भदवासिया रेलवे फाटक पर आरओबी बनाने की घोषणा की थी तब इसकी डिजाइन टी सेफ की बनाई गई थी। इस डिजाइन के बनाने के पीछे विशेषज्ञों का उद्देश्य एक ही था कि फाटक पर लगने वाले जाम से तो निजात मिलेगी ही, बल्कि नागौर व जयपुर से आने-जाने वाले वाहन चालकों को भी जाम से राहत पहुंचाई जा सकती थी।
आरओबी का अब 80 फीसदी से ज्यादा का काम पूरा हो गया है। ऐसे में इसकी डिजाइन बदलना काफी मुश्किल है। इसके लिए इसकी चौड़ाई बढ़ानी पड़ेगी और जंक्शन भी बनाना पड़ेगा, जो अब संभव नहीं है।- केके माथुर, निदेशक (अभियांत्रिकी), जेडीए
यह तो प्रारंभिक स्टेज पर ही संभव हो पाता, इसके लिए फिर दोनों तरफ की भूमि अवाप्त करनी पड़ती। वर्तमान स्थिति में अब सिर्फ रेलवे फाटक के ऊपर का हिस्सा ही बनना है, ऐसे में आरओबी को अब टी सेफ में बदलना नामुमकिन है।आरओबी निर्माण एजेंसी इरकॉन से जुड़े इंजीनियरों के अनुसार
पीछे की कहानी : भदवासिया आरओबी शुरू से ही राजनीति की भेंट चढ़ा हुआ है। ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए इसे टी सेफ में बनाना ही व्यावहारिक होता, लेकिन इसके लिए दोनों तरफ जमीन अवाप्त होती। ऐसा राजनीतिज्ञ नहीं चाहते थे और अफसर भी उन्हें नाराज नहीं करना चाहते थे, ऐसे में इसकी डिजाइन बदल गई। अब यक्ष प्रश्न यह है कि क्या 80 प्रतिशत काम होने के बाद आरओबी की डिजाइन को बदला जा सकता है?
आरओबी एक नजर
वर्तमान स्थिति
35करोड़
फाटक संख्या सी-7 पर आरओबी बनाया जा रहा है। इसके लिए जमीन अवाप्ति का काम पूरा होने के साथ 80 फीसदी निर्माण पूरा किया जा चुका है।
क्या होगा फायदा
निर्माण दो-तीन माह में पूरा हो जाएगा। तब इसका सीधा फायदा लोगों को मिलेगा। अभी इस फाटक पर ट्रेन के वक्त 15 मिनट का जाम लगता है। इस फाटक से 24 घंटे में 30 से 35 ट्रेनें गुजरती है।
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