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RPSC: इंजीनियरिंग करने के बाद भी वैकेंसी में आवेदन नहीं कर पा रहे युवा

8 वर्ष पहले
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जोधपुर.करीब दस साल पहले राज्य सरकार ने प्रदेश में रोजगार, स्किल डवलपमेंट और भविष्य की संभावनाओं के नाम पर कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रॉनिक्स विषय को बढ़ावा दिया, आज उन्हीं को आरपीएससी वैकेंसी के योग्य नहीं मान रही। ऐसे में इन विषयों में इंजीनियरिंग करने के बाद भी युवा बेरोजगार हैं। आईटीआई से लेकर इंजीनियरिंग तक इन विषयों को शुरू किया गया। बेहतर भविष्य के लिए युवाओं ने भी इनमें रुचि दिखाई और अथक मेहनत कर इंजीनियरिंग की, लेकिन सरकार के इन विषयों की बजाय सिविल विषय को प्राथमिकता देने से ये निराश हैं।
5 मई 2012 को आरपीएससी ने आईटीआई के उप प्राचार्य या अधीक्षक पद के लिए वैकेंसी निकाली। इसकी परीक्षा 13 मई को होनी है। इस पद की योग्यता सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल तय की गई है। इस योग्यता के कारण प्रदेश की सरकारी और गैर सरकारी आईटीआई से कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रॉनिक्स पाठ्यक्रम की डिग्री प्राप्त युवाओं के अरमानों पर पानी फिर गया है। क्योंकि आरपीएससी ने राज्य सरकार के सेवा नियमों के तहत उपप्राचार्य एवं अधीक्षक पद के लिए पूर्व निर्धारित योग्यता को आधार माना है।
ऐसे में इन पदों के लिए कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रॉनिक्स वाले आवेदन नहीं कर सकते। एक ओर तो प्रदेश में सरकारी और गैर सरकारी आईटीआई की संख्या एक हजार के करीब पहुंच चुकी है और लगातार बढ़ रही हैं। इनमें कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रॉनिक्स पाठ्यक्रम सर्वाधिक चल रहे हैं। इसके बावजूद इन विषयों को सरकारी पद की योग्यता में शामिल होने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
पता चला कि दस-बारह साल पूर्व विभाग के जिम्मेदारों ने राज्य सरकार के सेवा नियम में बदलाव करते हुए सिविल विषय को नई योग्यता के तौर पर जोड़ दिया। जबकि आज भी सिविल विभाग बमुश्किल से प्रदेश की दस संस्थानों में ही चल रहा है। समय और भविष्य की संभावनाओं के मद्देनजर कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रॉनिक्स विषय को योग्यता देनी चाहिए। प्रदेश की अधिकतर आईटीआई में ये विषय सर्वाधिक तौर पर पढ़ाए जा रहे हैं। इसके बावजूद आज तक न विभाग और न ही सरकार ने सेवा नियमों में संशोधन करने की पहल नहीं की। पुराने सेवा नियमों का सहारा लेकर प्रदेश का निदेशालय भी सिविल से जुड़े लोगों का गढ़ बन गया है।
सिविल के मुकाबले कंप्यूटर साइंस की छह गुना अधिक यूनिट
प्रदेश की गवर्नमेंट आईटीआई में कंप्यूटर साइंस 54, इलेक्ट्रॉनिक्स की 41 तो सिविल ड्राफ्टमैन की 13 यूनिट चल रही हैं। इसी तरह प्राइवेट आईटीआई में 257 कंप्यूटर साइंस, 86 इलेक्ट्रॉनिक्स और 44 सिविल की हैं। कुल मैकेनिकल इलेक्ट्रॉनिक्स की 127, कंप्यूटर साइंस की 311 व ड्राफ्टमैन सिविल की केवल 57 यूनिट हैं।
हरसंभव मदद करूंगा
जब मैं मंत्री था तो ऐसा कोई प्रस्ताव मेरे पास नहीं आया कि सर्विस रूल्स में बदलाव हो। अब अगर किसी को सरकारी नौकरी में सर्विस रूल्स के कारण दिक्कतें आ रही हैं तो मैं उसकी हरसंभव मदद करूंगा।
वासुदेव देवनानी, पूर्व तकनीकी शिक्षा मंत्री
सरकार को निर्णय करना है
सर्विस रूल्स में बदलाव का निर्णय सरकार को करना है। हां, अगर इसमें नए विषय जुड़ जाएं तो हजारों अभ्यर्थियों को फायदा मिल सकता है। वैसे यह मामला कैबिनेट में चला गया है।
एके आनंद, निदेशक, आईटीआई निदेशालय
एक्सपर्ट व्यू: सर्विस रूल्स में संशोधन कर नए विषय जोड़ने चाहिए
आज आईटी, कंप्यूटर साइंस व इलेक्ट्रॉनिक्स का जमाना है। ऐसे में सर्विस रूल्स में संशोधन कर इन विषयों को भी जोड़ना चाहिए। पूर्व में इसकी कोशिश की गई थी, लेकिन गलत ट्रैक पर चलने के कारण संशोधन नहीं हो सका। सरकार को पहल कर इन नए विषयों को जोड़ना चाहिए ताकि हजारों युवाओं को फायदा मिल सके। सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल में भी कंप्यूटर साइंस का उपयोग होने लगा है। ऐसे में इन विषयों को नहीं जोड़ना गलत होगा।
आईआर त्रिवेदी, शिक्षाविद्